इस्राइल में बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार गिर गई है। इस तरह देश दो साल के अंदर चौथे आम चुनाव की तरफ बढ़ गया है। अब संभावना है कि अगली 23 मार्च को नया नैसेट (इस्राइल की संसद) चुनने के लिए इस्राइल के मतदाता वोट डालेंगे।
बेंजामिन नेतन्याहू सरकार बुधवार यानी 23 दिसंबर की तय समय सीमा के भीतर संसद से बजट पास नहीं करा पाई। इसमें उसकी नाकामी के बाद नैसेट के स्पीकर यारिन लेविन ने संसद को भंग करने का एलान कर दिया। लंबी खींचतान के बाद इस साल मई में नेतन्याहू ने विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। लेकिन बजट के मुद्दे पर दोनों नेता सहमत नहीं हो सके। गैंट्ज ने कुछ बजट प्रस्ताव सामने रखे थे, जिसके लिए नेतन्याहू राजी नहीं हुए। इस कारण आखिरकार ये गठबंधन सरकार गिर गई है।
ब्लू एंड ह्वाइट पार्टी के नेता और रक्षा मंत्री गैंट्ज चाहते थे कि सरकार दो साल का बजट पारित करे। उनका कहना था कि इससे नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनकी ब्लू एंड ह्वाइट पार्टी के बीच दीर्घकालिक एकता को लेकर भरोसा बंधेगा। बताया जाता है कि नेतन्याहू पहले इसके लिए तैयार हो गए थे, लेकिन बाद उससे मुकर गए। बढ़ते मतभेदों के बीच कुछ रोज पहले गैंट्ज ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री वादाखिलाफी कर रहे हैं और उन्होंने इस बारे में झूठ बोला है।
अब नए चुनाव में नेतन्याहू को बेनी गैंट्ज के अलावा एक नई चुनौती का भी सामना करना होगा। लिकुड पार्टी से हाल ही में अलग हुए नेता गिडियॉन सार की लोकप्रियता हाल में तेजी से बढ़ी है। मंगलवार को जारी हुए एक ओपिनियन पोल में सार को प्रधानमंत्री के बराबर जनसमर्थन मिलता दिखाया गया। इसकी एक वजह यह भी है कि कोरोना महामारी से निपटने में सरकारी नाकामियों का दोष भी नेतन्याहू के माथे मढ़ा जा रहा है। नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले पहले से चल रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण टली इन मामलों की सुनवाई फरवरी में फिर शुरू होने की संभावना है।
गिडियॉन सार ने पिछले महीने में लिकुड पार्टी के भीतर नेतन्याहू के नेतृत्व को चुनौती दी थी। उसमें नाकाम रहने के बाद इस महीने वे पार्टी से अलग हो गए। उन्होंने न्यू होप नाम की नई पार्टी बनाई है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में लिकुड पार्टी के कई और नेता और कार्यकर्ता इस पार्टी में शामिल होंगे।
इस्राइल की संसद में 120 सदस्य हैं। बहुमत पाने के लिए 61 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होती है। लेकिन पिछले कई चुनावों से किसी पार्टी के इतने सदस्य नहीं जीते हैं। इसलिए गठबंधन सरकारें बनती रही हैं। अब एक नई पार्टी के मैदान में आ जाने से चुनाव नतीजों में और अनिश्चितता की संभावना जताई जा रही है। हाल के समय में देश में कई धार्मिक और उग्र राष्ट्रवादी पार्टियों की लोकप्रियता भी बढ़ी है। यह भी विखंडित जनादेश सामने का एक कारण रहा है।
इस्राइल में वामपंथी लेबर पार्टी पहले एक प्रमुख ताकत होती थी। लेकिन अब वह और दूसरी प्रगतिशील पार्टियां राजनीतिक परिदृश्य से हट चुकी हैं। इसलिए मुकाबला दक्षिणपंथ और धुर दक्षिणपंथ के बीच सिमटता चला गया है। हाल के वर्षों में बेनी गैंट्ज लिकुड पार्टी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन कर उभरे थे। लेकिन अब लगता है कि उनकी लोकप्रियता काफी गिर गई है।
मंगलवार को आए जनमत सर्वेक्षण में बताया गया कि पिछले चुनाव में 33 सीटें जीतने वाली उनकी ब्लू एंड ह्वाइट पार्टी अगले चुनाव में महज छह सीटों पर सिमट सकती है। इसका कुल चुनाव नतीजों पर क्या असर होगा, यहां के राजनीतिक विश्लेषक अभी इस बारे में कुछ कहने से बच रहे हैं।