लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए शक्तिशाली विस्फोट के बाद अब लोगों का अपनी ही सरकार के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। शनिवार रात हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी तीन मंत्रालयों में घुस गए और जमकर तोड़फोड़ की। उन्होंने संसद में भी घुसने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने इसे नाकाम कर दिया। इस दौरान लोगों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई। इसमें एक पुलिस अफसर की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री हसन दियाब ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, जो बेअसर साबित हुई। प्रदर्शनकारी विदेश, वित्त और पर्यावरण मंत्रालय में सुरक्षा घेरा तोड़कर घुसे और तोड़फोड़ की। आग लगाने की भी कोशिश की गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी संसद पहुंचे और इसमें घुसने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक लिया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नेताओं को चौराहे पर लाकर फांसी पर लटकाओ। वे प्रधानमंत्री हसन समेत अन्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनके हाथों में पोस्टर थे, जिस पर लिखा था कि या तो मंत्री इस्तीफा दें या उन्हें चौराहे पर फांसी दो। गौरतलब है कि मंगलवार को बेरूत के पूर्वी तट पर 27 हजार टन अमोनियम नाइट्रेट में विस्फोट हुआ था। धमाके में अब तक 160 लोगों की मौत हो चुकी है और 6 हजार से अधिक घायल हैं। दर्जनों लोग अब भी लापता हैं।
दिवालिया होने के कगार पर लेबनान
कोरोना महामारी के बीच अभूतपूर्व आर्थिक और वित्तीय संकट से जूझ रहे लेबनान अब दिवालिया होने के कगार पर पहुंच चुका है। बेरूत के गवर्नर का कहना है कि धमाके की वजह से देश को 10 से 15 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। 62 हजार इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं और तीन लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। देश के पास एक माह से भी कम समय का खाद्य बचा है।
प्रधानमंत्री ने मांगा दो माह का वक्त
प्रधानमंत्री हसन ने कहा, हम लोगों की नाराजगी समझ सकते हैं। विस्फोट के लिए जिम्मेदार लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा। हम चाहते हैं कि देश की व्यवस्थाओं और बाकी क्षेत्रों में अब बड़े सुधार हों। हमें दो महीने का वक्त दीजिए। दूसरी पार्टियों से बातचीत कर चुनाव सुधार के लिए कदम उठाएंगे। इसके बाद लोग अपनी पसंद की सरकार चुन सकेंगे। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सरकार वक्त मांगकर मामले को ठंडा करना चाहती है।