चीन ने भारत को लेकर अपना नरम रुख दिखाया है। बीजिंग ने कहा है कि भारत और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि सीमा पर स्थिति सामान्य और स्थिर है।
एक शीर्ष चीनी अधिकारी ने कहा कि चीन और भारत को इस सही रणनीतिक धारणा पर कायम रहना चाहिए कि वह प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं। इसके साथ ही एक दूसरे के विकास के अवसर हैं न कि खतरे।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने को मीडिया ब्रीफिंग में भारत-चीन संबंधों पर प्रतिक्रिया दी। यह बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने भारत और चीन के साथ रूस के करीबी संबंधों का जिक्र किया था। पुतिन ने गुरुवार को वैश्विक समाचार एजेंसियों के प्रमुखों से बातचीत के दौरान यह बात कही थी। लिन ने कहा कि फिलहाल चीन-भारत सीमा की स्थिति आम तौर पर स्थिर है। दोनों पक्षों के बीच एक संचार चैनल है।
'दोनों देश सहयोगी साझेदार हैं'
तीनों देशों के संबंध में क्या कहा?
पाकिस्तान के साथ चीन के घनिष्ठ संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं पर लिन ने कहा कि बीजिंग भारत और पाकिस्तान दोनों को संवाद और परामर्श के माध्यम से अपने मतभेदों को ठीक से सुलझाने और क्षेत्र को शांतिपूर्ण और स्थिर बनाए रखने में समर्थन करता है। भारत, चीन और रूस के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए लिन ने कहा कि तीनों देश उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं। अच्छे संबंध बनाए रखना न केवल तीनों देशों के अपने-अपने हितों में है। बल्कि विश्व शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी जरूरी है।
पुतिन ने दोनों देशों के बारे में क्या कहा?
'सभी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश में'
पीटीआई के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ विजय जोशी के एक सवाल का जवाब देते हुए पुतिन ने कहा, 'भारत और चीन के बीच संबंध नाजुक और बहुआयामी हैं। इनमें हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। बेशक, हम अपने दोनों मित्रों -भारत और चीन के साथ बातचीत करते हैं।' पुतिन ने कहा, 'राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ही सीमा मुद्दे सहित आपसी हित के सभी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।'
एशिया में मॉस्को के रणनीतिक संतुलन पर प्रकाश डालते हुए पुतिन ने भारत और चीन के साथ रूस के संबंधों को स्वाभाविक रूप से विकसित होने वाला बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली के साथ मॉस्को का बढ़ता तालमेल बीजिंग की कीमत पर नहीं हो रहा है। ठीक उसी तरह जैसे चीन के साथ रूस का गहरा गठबंधन भारत के साथ उसके संबंधों को खतरे में नहीं डालता है।