अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत दौरे से पहले ट्रंप प्रशासन ने वित्त वर्ष 2021 में अहम माने जाने वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए 1.5 अरब डॉलर (करीब 10 हजार करोड़ रु.) प्रस्तावित किए हैं। व्हाइट हाउस ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस क्षेत्र को चीन के अहितकर प्रभाव से मुक्त एवं स्वतंत्र बनाने के उसके प्रयासों का हिस्सा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2021 के लिए देश का रक्षा बजट बढ़ाकर करीब 53 खरब रुपये (740 अरब डालर) करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव चीन और रूस के सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम को देखते हुए किया गया है जो अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है। ट्रंप के रक्षा बजट प्रस्ताव के मुख्य पहलू हैं परमाणु आधुनिकीकरण, मिसाइल निष्फल करना आदि। इसके अलावा अंतरिक्ष, साइबर तथा हवाई क्षेत्र के लिए भी इसमें कोष का प्रावधान किया गया है।
व्हाइट हाउस और पेंटागन की ओर से जारी बजट प्रस्ताव में ट्रंप प्रशासन ने दो शत्रुओं रूस तथा चीन की ओर से खतरे को रेखांकित किया है। इसमें कहा गया है कि ये दोनों देश सैन्य आधुनिकीकरण की राह पर हैं और अपने पड़ोसियों को विवश कर रहे हैं। बजट प्रस्ताव में पेंटागन ने कहा है कि सुरक्षा परिदृश्य बेहद खतरनाक ढंग से बदल रहा है। चीन और रूस पड़ोसियों को मजबूर करने, विरोधी स्वरों को दबाने और स्वतंत्रता को कमतर करने के लिए आक्रामक तरीके अपना रहे हैं। इसमें ईरान और उत्तर कोरिया का भी जिक्र है और कहा गया है कि वे बड़े पैमाने पर तबाही मचाने में सक्षम हथियारों को विकसित कर रहे हैं।