ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से अपने उस कार्यकारी आदेश को लागू करने की अनुमति मांगी है, जिसमें मेल-इन वोटिंग के लिए योग्य मतदाताओं की संघीय नागरिकता सूची बनाने और उसी के आधार पर बैलेट भेजने का प्रस्ताव है। 23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया ने इस आदेश को संविधान के खिलाफ बताते हुए अदालत में चुनौती दी है। निचली अदालतों ने फिलहाल आदेश पर रोक लगा रखी है, जबकि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि अगस्त तक इसे लागू कर दिया जाए ताकि नवंबर के मिडटर्म चुनावों में इसका प्रभाव दिखाई दे सके।
क्या है सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई आपातकालीन अपील?
यह आपातकालीन अपील उस फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें एक अपीलीय अदालत ने राष्ट्रपति के आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखा था। यह रोक देश के लगभग आधे हिस्से में लागू है और नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले आदेश को प्रभावी होने से रोकती है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की है?
अमेरिकी न्याय विभाग (जस्टिस डिपार्टमेंट) ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि जब तक इस मामले की न्यायिक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रंप प्रशासन को प्रस्तावित बदलाव लागू करने की अनुमति दी जाए।
ट्रंप के आदेश में क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं?
मार्च में जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने सरकार को योग्य मतदाताओं की एक 'राज्य नागरिकता सूची' तैयार करने का निर्देश दिया था। आदेश के अनुसार, मेल बैलेट केवल उन्हीं मतदाताओं को भेजे जाएंगे, जिनका नाम इस सूची में शामिल होगा।
राज्यों ने इस आदेश का विरोध क्यों किया?
23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया के डेमोक्रेटिक अधिकारियों ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दी है। उनका कहना है कि अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव संबंधी नियम बनाने का अधिकार राज्यों और कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। उनके वकीलों का तर्क है कि प्रस्तावित बदलावों का दुरुपयोग हो सकता है और इससे चुनावी प्रक्रिया में भ्रम तथा अव्यवस्था पैदा हो सकती है।
निचली अदालतों ने क्या फैसला दिया है?
मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने शिकायतकर्ता राज्यों के पक्ष में फैसला देते हुए इस आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सप्ताहांत में फर्स्ट यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ़ अपील्स की एक पीठ ने भी इस रोक को बरकरार रखा।
कौन-कौन सी एजेंसियों को क्या जिम्मेदारी दी गई है?
मार्च में जारी आदेश के तहत यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS) और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन के आयुक्तों को योग्य मतदाताओं की एक संघीय सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यूएस पोस्टल सर्विस को केवल उसी सूची में शामिल मतदाताओं तक मेल बैलेट पहुंचाने के लिए कहा गया है।
ट्रंप प्रशासन ने अपने पक्ष में क्या दलील दी है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में कहा गया है कि ट्रंप का आदेश केवल सामान्य नीतिगत दिशा-निर्देश तय करता है और यह राज्यों को चुनाव कराने की प्रक्रिया बदलने का निर्देश नहीं देता।
सरकार ने अदालत के आदेश पर क्या आपत्ति जताई?
सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने अपनी अपील में लिखा कि निचली अदालत की रोक अनुचित है, क्योंकि संबंधित एजेंसियां अभी इस बात पर विचार ही कर रही हैं कि आदेश को किस प्रकार या क्या लागू किया जाए। इसके बावजूद अदालत ने पहले ही यह मान लिया कि एजेंसियां जो भी कदम उठाएंगी, वह गैरकानूनी होगा।
ट्रंप प्रशासन जल्द सुनवाई क्यों चाहता है?
ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द फैसला देने का आग्रह किया है। उसका कहना है कि यदि नई नीति का असर नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में दिखाना है, तो उसे अगस्त तक लागू किया जाना आवश्यक है।
गैर-नागरिकों की वोटिंग को लेकर ट्रंप का क्या तर्क है?
ट्रंप ने इन प्रस्तावित बदलावों को गैर-अमेरिकी नागरिकों द्वारा मतदान रोकने का उपाय बताया है। हालांकि, अमेरिका में गैर-नागरिकों द्वारा मतदान के मामले बेहद दुर्लभ हैं और ऐसा करना गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके चलते संबंधित व्यक्ति को देश से निष्कासित भी किया जा सकता है।
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जून में संघीय जज ने क्या कहा था?
बोस्टन स्थित अमेरिकी जिला अदालत की जज इंदिरा तलवानी, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नामित किया था, ने जून में 3 नवंबर को होने वाले चुनावों के मद्देनज़र इस कार्यकारी आदेश को लागू करने पर रोक लगाने के पक्ष में फैसला दिया था।