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Bangladesh: जल्द ही शेख हसीना को लेनी पड़ेगी भारत से बाहर शरण? लंदन या खाड़ी के देश में जाने की संभावना

सार

बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है। पड़ोसी देश में संवोदनशील स्थिति को देखकर शेख हसीना को अधिक दिनों तक दिल्ली में रोकना मुश्किल हो सकता है।
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शेख हसीना - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बांग्लादेश में बदलते घटनाक्रम पर भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और दुनिया के प्रमुख देशों की निगाह है। मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास मंत्रणा के लिए पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि एनएसए अजीत डोभाल भी मंत्रणा में शामिल हो सकते हैं। विदेश मामले के जानकारों का कहना है कि भारत के लिए यह समय काफी संवेदनशील है। इसलिए भारत शेख हसीना को बांग्लादेश से सुरक्षित निकालने में भले सहयोगी रहा है, लेकिन अपने यहां हसीना को अधिक दिनों तक शरण देने में संकोच कर सकता है। शेख हसीना को सी-130 जे हरक्युलिस विमान से हिंडन एयरपोर्ट लाने के बाद उन्हें दिल्ली लाया गया है। बांग्लादेश के भारत स्थिति उच्चायोग की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके साथ साथ भारत सभी पहलुओं पर गौर कर रहा है।

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अधिक दिनों तक दिल्ली में शरण देने की संभावना कम
बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है। पड़ोसी देश में संवोदनशील स्थिति को देखकर शेख हसीना को अधिक दिनों तक दिल्ली में रोकना मुश्किल हो सकता है। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि शेख हसीना के समय में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं। बांग्लादेश में शेख हसीना ने बहुत शानदार काम किया है। उन्होंने वहां की सेना को गैर राजनीतिक बनाने में उल्लेखनीय काम किया है। लेकिन इन सबके बावजूद भारत दिल्ली में शेख हसीना को अधिक समय तक रोककर बड़ा खतरा मोल नहीं लेगा। इसलिए ऐसा लग रहा है कि जल्द ही शेख हसीना ब्रिटेन या खाड़ी देश से शरण मांग सकती हैं।

बांग्लादेश को लेकर क्या करेगा भारत?
बांग्लादेश के सैन्य जनरल ने वहां जल्द अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा की है। मुख्य विपक्षी दल बीएनपी ने भी अंतरिम सरकार की संभावना पर जोर दिया है। ऐसे में भारत की कोशिश बिना समय गंवाए बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार के गठन में सहयोग देने की होगी। ताकि वहां की अस्थिरता पर काबू पाया जा सके। एक पूर्व राजनयिक का कहना है कि अभी बांग्लादेश का जनसमर्थन शेख हसीना के पक्ष में नहीं है। वहां तोड़फोड़, विरोध प्रदर्शन और लूटपाट की स्थिति बन गई है। देश की कट्टरपंथी ताकतें इसका लाभ उठा सकती हैं। इसके अलावा देश को अस्थिर करने वाली बाहरी ताकतें भी ऐसे अवसर का लाभ ले सकती हैं। इसलिए नई दिल्ली की कोशिश बांग्लादेश के जनसमर्थन के साथ खड़े होने की होनी चाहिए। भारत सरकार कभी भी बांग्लादेश के लोगों के हितों के खिलाफ नहीं रही है। हम उन्हें नाराज नहीं कर सकते। भारत के लिए शांति, स्थिर और स्थाई पड़ोसी महत्वपूर्ण है। इसलिए समझा जा रहा है कि भारत यथा शीघ्र वहां बनने वाली भावी आंतरिम सरकार को अपना समर्थन देगा।  
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विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी एसके शर्मा कहते हैं कि अभी तो वहां अंतरिम सरकार का गठन ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह अंतरिम सरकार ही वहां आम चुनाव कराकर स्थिर सरकार देने का कदम उठाएगी। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि बांग्लादेश में गठित होने वाली अंतरिम सरकार वहां कब आम चुनाव कराएगी और कब एक स्थिति, जनता द्वारा चुनी सरकार पड़ोसी देश में काबिज होगी।

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