कोस्ट गार्ड औऱ बीएसएफ ने निगरानी बढ़ाई
बांग्लादेश में बने हालात के बीच भारत-बांग्लादेश समुद्री सरहद पर कोस्ट गार्ड ने अपनी निगरानी को काफी बढ़ा दिया है। बंगाल की समुद्री सरहद पर कोस्ट गार्ड के चार बड़े शिप, हॉवरक्राफ्ट, डोर्नियर और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। हल्दिया बेस से लेकर पारदीप तक कोस्ट गार्ड पूरी तरह मुस्तैद है। मछुआरों की हर नाव की चेकिंग की जा रही है। वहीं घुसपैठ की संभावनाओं को देखते हुए बीएसएफ ने भी चौकसी बढ़ा दी है। रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी और आईएसआई तीनों मिल कर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश को अंजाम दे सकते हैं। इससे पहले भी जब बीएनपी और जमात दोनों गठबंधन में सरकार चला रहे थे, तभी भी दोनों ने मिल कर भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रची थी।
हथियारों से भरे 10 ट्रक चटगांव में हुए थे जब्त
भारत की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के सेवानिवृत्त उप महानिदेशक, मेजर जनरल गगनजीत सिंह ने पहले बताया था कि एक बार हथियारों की एक बड़ी खेप, जिनमें हथियारों से भरे 10 ट्रक बांग्लादेश के चटगांव में जब्त किए गए थे। ये हथियार भारत को अस्थिर करने के लिए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम और मणिपुर के विद्रोही संगठनों के लिए थे। सूत्र बताते हैं कि ये बात 1 अप्रैल 2004 की है, जब रात को बांग्लादेश तटरक्षक बल और स्थानीय पुलिस की एक टीम कर्णफुली नदी के दक्षिण-पूर्वी तट पर चटगांव बंदरगाह में एक घाट पर पहुंची, जिसका मेंटेनेंस का जिम्मा बांग्लादेश केमिकल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन स्वामित्व वाली चटगांव यूरिया फर्टिलाइजर लिमिटेड के पास था। जब टीम वहां पहुंची, तो उन्हें हथियार और गोला-बारूद से भरे दस ट्रक मिले, जिनमें 4,930 असॉल्ट राइफलें और बंदूकें, 27,020 ग्रेनेड, 840 रॉकेट लांचर, 300 रॉकेट, 2,000 ग्रेनेड-लॉन्चिंग ट्यूब, 6,392 मैगजीन और 114,0520 गोलियां शामिल थीं, जिन्हें पहले ही दो नावों से उतार दिया गया था।
सेना की दो बटालियनों के लिए काफी थे इतने हथियार
सूत्रों ने बताया कि इतनी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिले थे, जो सेना की दो बटालियनों के लिए काफी होते हैं। जांच में पता चला कि हथियारों की ये खेप यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के लिए थी, जो भारत से असम की आजादी की मांग कर रहा था। उस समय बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी की गठबंधन वाली सरकार थी, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया कर रही थीं। खुद छापा मारने वाली टीम को भी नहीं पता था कि यहां हथियारों के तस्करों से उनका सामना होगा। उनके पास केवल ड्रग्स तस्करी की ही जानकारी थी। जांच से पता चला कि बीएनपी-जमात शासन के दौरान, बांग्लादेश की राष्ट्रीय खुफिया सुरक्षा (एनएसआई) और सेना खुफिया महानिदेशालय (डीजीएफआई) अधिकारियों ने उल्फा कमांडर परेश बरुआ की मदद कर रहे थे औऱ उसे वहां सेफ हाउस भी दिया था। चौंकाने वाली बात यह थी कि हथियार तस्करी कांड में शामिल 50 से ज़्यादा अधिकारियों में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सरकारी अधिकारी, प्रमुख कंपनी अधिकारी और प्रमुख खुफिया अधिकारी शामिल थे।
सूत्रों ने बताया कि जांच में यह भी पता चला था कि राष्ट्रीय खुफिया सुरक्षा (एनएसआई) और सेना खुफिया महानिदेशालय (डीजीएफआई) के अफसरों ने ढाका के संयुक्त सैन्य अस्पताल में बरुआ से मुलाकात भी की थी। लेकिन 30 जनवरी 2014 को चटगांव की एक विशेष अदालत ने परेश बरुआ और 13 अन्य लोगों की मौत की सजा को माफ कर दिया, जिनमें प्रमुख आरोपी जमात-ए-इस्लामी प्रमुख और तत्कालीन उद्योग मंत्री निजामी और पूर्व गृह राज्य मंत्री बाबर भी शामिल थे।
आईएसआई ने चुनाव जीतने के लिए बीएनपी को दिए पैसे
सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक प्रमुख तारिक रहमान (डार्क प्रिंस के नाम से मशहूर) और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संबंध जगजाहिर हैं। सितंबर 2012 में, पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के सामने एख मामले की सुनवाई के दौरान एजेंसी के पूर्व प्रमुख असद दुर्रानी ने 1991 के संसदीय चुनावों के दौरान बीएनपी को पैसे पहुंचाने की बात स्वीकारी थी। आईएसआई ने 1991 के चुनावों से पहले बीएनपी अध्यक्ष खालिदा जिया को 50 करोड़ रुपये दिए थे। वहीं, जब जिया 2001-2006 तक फिर से सत्ता में आईं, तो आईएसआई ने फिर से ढाका को पैसे दिए थे, ताकि भारत के पूर्वोत्तर में अशांति फैलाई जा सके।
परवेज मुशर्रफ ने की थी अनूप चेतिया के साथ बैठक
सूत्रों ने बताया कि 2010 में अवामी लीग के मंत्री अशरफुल इस्लाम ने खुलासा किया था कि जुलाई 2002 में, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने बांग्लादेश की यात्रा के दौरान जेल में बंद उल्फा नेता अनूप चेतिया के साथ एक गुप्त बैठक भी की थी। चेतिया ने मुशर्रफ के साथ शेरेटन होटल में डेढ़ घंटे की बैठक की थी। उस दौरान खालिदा जिया की सरकार थी। बाद में जब जब खालिदा जिया मार्च 2006 में भारत आईं तो उन्हें गृह मंत्रालय ने एक डोजियर सौंपा था, जिसमें यह जानकारी थी कि कैसे दिल्ली और वाराणसी बम विस्फोटों के आरोपी आईएसआई के संरक्षण में बांग्लादेश में छिपे हुए थे। ढाका को 172 आतंकवादी शिविरों की सूची भी दी गई थी, जहां आतंकवादियों को भारत में हिंसा भड़काने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही थी। हालांकि खालिदा जिया ने उस डोजियर पर कोई एक्शन नहीं लिया।
निश्चिंत हो गया था भारत
सूत्रों ने बताया कि शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद भारत बांग्लादेश की तरफ से बहुत हद तक निश्चिंत हो गया था। छोटी-मोटी घुसपैठ और सोने या जानवरों की तस्करी के मामलों को छोड़ कर बांग्लादेश की तरफ से कोई बड़ी समस्या पैदा नहीं हुई। शेख हसीना ने सत्ता में आते ही आईएसआई की गतिविधियों पर लगाम कसी और आतंकी शिविरों को बंद किया। भारतीय एजेंसियों ने बांग्लादेश में छिपे वांटेड आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में ढाका के साथ जो इनपुट साझा किए थे, उन पर शेख हसीना ने तुरंत एक्शन लिया। ऐसे लोगों को या तो गिरफ्तार किया गया या फिर उन्हें निर्वासित कर दिया गया। लेकिन शेख हसीना के भारत भागने के लिए मजबूर होने के बाद ढाका में बीएनपी और जमात के सत्ता में आने से अब यह सब बदलने वाला है।
आईएसआई के ये विंग हुए एक्टिव
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान में शासन कर रहे तालिबान से उनकी जमीन पर आतंकवादी समूहों को ट्रेनिंग देने की बात कही थी। लेकिन तालिबान ने साफ इनकार कर दिया। वहीं, अब अनुमान लगाया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़काने और आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तान अब बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल कर सकता है। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान में आईएसआई निदेशालय में मौजूद सबसे बड़े विंग जॉइंट इंटेलिजेंस ब्यूरो (जेआईबी) का सब-सेक्शन-1 इस समय भारत पर फोकस कर रहा है। इस विंग में ही आईएसआई के लगभग 60 फीसदी कर्मचारी काम करते हैं। बांग्लादेश में सरकार गिरने के साथ ही यह विंग भी एक्टिव हो गया है और ढाका और भारत की सीमा से लगे इलाकों में अपने एसेट्स को एक्टिव करने का काम शुरू कर दिया है। आईएसआई का एक और जासूसी विंग भी एक्टिव हो गया है, और बांग्लादेश में एजेंट्स की नई भर्ती का काम शुरू कर दिया है।
डार्क प्रिंस की आईएसआई के साथ मीटिंग
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) ने कथित तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक प्रमुख तारिक रहमान (डार्क प्रिंस के नाम से मशहूर) के साथ मिलकर लंदन में शेख हसीना के खिलाफ साजिश रची थी। उनके पास सऊदी अरब में तारिक रहमान और आईएसआई अधिकारियों के बीच हुईं बैठकों के सबूत हैं। बीएनपी की यूएई यूनिट के प्रमुख जाकिर हुसैन और सेवानिवृत्त पाकिस्तानी सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ, जो दुबई में आईएसआई का एजेंट है, उनके बीच लगातार बातचीत होती रहीं और उसने तारिक रहमान और आईएसआई के नंबर वन पॉलिसी मेकर जावेद मेहदी के बीच जेद्दा में मीटिंग फिक्स की थी। तारिक रहमान 2008 से लंदन में आत्म निर्वासन में है।
आईएसआई का खास है शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ
खुफिया सूत्रों के अनुसार, शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ 54 कोर्स का पाकिस्तानी सेना का अफसर रहा है और 2004 में रिटायर हो गया था, जिसके बाद से वह दुबई में है और बांग्लादेश में अपने शीर्ष अफसरों और राजनीतिक नेताओं के बीच कॉन्टैक्ट बनाने में आईएसआई उसका इस्तेमाल करती है। सूत्रों ने बताया कि जाकिर ने शाहिद महमूद से कम से कम 11 बार मुलाकात की थी। खुफिया एजेंसियों को दस्तावेज मिले हैं, उनमें जाकिर आईएसआई एजेंट शरीफ के साथ अपनी मुलाकात के दौरान तारिक को 'बॉस' कहता था और आखिरी मुलाकात के दौरान उसने आईएसआई का संदेश लंदन तक पहुंचाने का भरोसा दिया था।
तारिक रहमान के दाऊद इब्राहिम से संबंध
खुफिया एजेंसियों ने इस बात का भी खुलासा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के भारतीय अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से भी रिश्ते रहे हैं। दुबई में तारिक रहमान और दाऊद इब्राहिम की कई मुलाकातें हुई हैं। यहां तक कि दोनों के बीच व्यापारिक संबंध भी रहे हैं। तारिक ने दुबई में दाऊद की एक प्रॉपर्टी भी 60 मिलियन डॉलर में खरीदी है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि तारिक रहमान भारत के लिए भी बड़ा खतरा है।
एक इंटरसेप्टेड बातचीत में, शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ ने जाहिर तौर पर जाकिर हुसैन से 'पीले लोगों' के साथ बैठकों के बारे में अपडेट मांगा था, जिसमें चीनी अधिकारियों का जिक्र था। बीएनपी के कार्यवाहक प्रमुख तारिक रहमान ने पहले कई बार चीनी अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं। इस बातचीत में बीएनपी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सहायक सचिव हुमायूं कबीर का भी नाम सामने आया था। कबीर, बीएनपी उपाध्यक्ष इकबाल हुसैन तुकू और दो अन्य बीएनपी नेताओं के साथ 13 से 16 नवंबर तक चीन के दौरे पर गया था।
बांग्लादेशी मीडिया पर किया था 'कब्जा'
सूत्रों ने यह भी बताया कि आईएसआई ने 2017 की शुरुआत में ही बांग्लादेशी मीडिया को अपने 'कब्जे' में लेने की योजना बनाई थी, जिसमें शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग और भारत विरोधी कवरेज को बढ़ावा देने के लिए 100,000 डॉलर का फंड आवंटित किया गया था। इस योजना में बंगाली दैनिक समाचार पत्र सहित संपादकों और मीडिया कर्मियों को शामिल किया गया था।