UN: ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (जीएचआरडी) एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है। यह संगठन वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की वकालत और सुरक्षा के लिए समर्पित है। जातीय, भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों के व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन मामलों पर इसका खास ध्यान है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र के दौरान जेनेवा में ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार विषय पर एक चर्चा आयोजित की। यह आयोजन 'ब्रोकन चेयर' स्थल पर किया गया, जहां भारत की सामाजिक कार्यकर्ता रोहिणी घावरी समेत विश्वभर के मानवाधिकार प्रतिनिधियों ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं व अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते उत्पीड़न पर प्रकाश डाला।
ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (जीएचआरडी) एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में है। यह संगठन वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की वकालत और सुरक्षा के लिए समर्पित है। जातीय, भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों के व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन मामलों पर इसका खास ध्यान है।
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एनजीओ ने अपने बयान में कहा कि यह आयोजन का उद्देश्य सरकारों और वैश्विक संस्थाओं की ओर से नजरअंदाज किए जा रहे धार्मिक व जातीय अल्पसंख्यकों के संघर्ष पर ध्यान आकर्षित करना है। रोहिणी घावरी ने कहा, बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। धर्म के नाम पर लोग एक-दूसरे की हत्या कर रहे हैं। उन्होंने यूएन के सामने लगाए गए विरोध शिविर का जिक्र करते हुए कहा कि ईसाई, बौद्ध और हिंदू समुदायों के लोग एकजुट होकर दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं।
घावरी ने कहा, हम इन अत्याचारों को रोकने के लिए वैश्विक हस्तक्षेप की मांग करते हैं। यूएन में दुनियाभर के मानवाधिकार कार्यकर्ता अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में हिंदुओं की जमीनें जब्त की जा रही हैं, उनके मंदिर तोड़े जा रहे हैं और महिलाओं के साथ यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। पाकिस्तान में भी ईसाइयों और हिंदुओं को जबरन धर्मांतरण के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है। जीएचआरडी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन देशों पर दबाव बनाने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।