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कोरोना और बाढ़ से परेशान बांग्लादेश, गैर कोरोना मरीजों के लिए भी अब खुलेंगे अस्पताल

Sat, 15 Aug 2020 03:52 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।

सार

  • कोविड अस्पतालों को अब सामान्य अस्पताल बनाने का फैसला, आम मरीजों पर सरकार का ध्यान
  • कोविड19 के एक्टिव मरीजों के मामले में बांग्लादेश दुनिया में आठवें और एशिया में दूसरे नंबर पर
  • स्वास्थ्य मंत्री का दावा, घट रहे हैं कोरोना के मामले, अस्पताल के बेड खाली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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एक तरफ कोरोना महामारी तो दूसरी तरफ बाढ़ की भयंकर स्थिति से बांग्लादेश परेशान है। कोविड 19 के मरीजों की संख्या के साथ साथ आम मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आम मरीजों को इलाज में खासी परेशानी हो रही है, क्योंकि देश के ज्यादातर अस्पताल कोविड अस्पतालों में तब्दील कर दिए गए हैं।

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हालात की गंभीरता को देखते हुए अब सरकार ने तय किया है कि अगस्त के अंत तक सभी कोविड अस्पतालों को पहले की तरह सामान्य अस्पताल बना दिया जाएगा जहां सभी मरीज अपना इलाज करा सकेंगे। कोरोना के हालात जिस तरह भारत में लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, ठीक उसी तरह बांग्लादेश में हालात काबू के बाहर हो रहे हैं।

बांग्लादेश अब दुनिया में सक्रिय कोरोना मामलों में आठवें नंबर पर पहुंच गया है जबकि एशियाई देशों में वह भारत के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत में फिलहाल 13 अगस्त तक 6,58,417 एक्टिव मामले सामने आ चुके हैं। वहीं अमेरिका अब भी एक्टिव केस के मामले में 23,78,426 मरीजों के साथ पहले नंबर पर है। उधर, बांग्लादेश में 1,09,896 सक्रिय मामले हैं।
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हालांकि बांग्लादेश भी यही दावा कर रहा है कि उसके यहां कोविड-19 के मामले अब नियंत्रण में हैं। ठीक होने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री जाहिद मलेक का दावा है कि कोविड-19 के मामले लगातार कम हो रहे हैं और अब ये जरूरी हो गया है कि जिन अस्पतालों को पूरी तरह कोविड अस्पताल बना दिया गया था, उन्हें अब सामान्य मरीजों के लिए खोल दिया जाए।

अगस्त के अंत तक देश के उन तमाम अस्पतालों को आम मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा, जो फिलहाल कोविड अस्पताल बना दिए गए हैं। उनका दावा है कि तमाम अस्पतालों के बेड खाली हैं, जबकि दूसरी तरफ आम मरीजों को काफी मुश्किलें हो रही हैं। उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर और अस्पताल नहीं मिल रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने देश में आठ कैंसर अस्पताल खोलने को लेकर समीक्षा बैठक में हिस्सा लेते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने आंकड़ों के आधार पर यह बताने की कोशिश की कि कोरोना मरीजों की संख्या बेशक बढ़ी हो, लेकिन अब अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने वालों की संख्या लगातार कम हो रही है। लोग होम क्वारंटीन रहकर ही खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में कोविड के नाम पर अस्पताल खाली क्यों रहें, आम मरीजों के लिए अस्पतालों का खोला जाना जरूरी हो गया है।  

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