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Bangladesh: रहमान ने मोहम्मद यूनुस को दिया झटका, BNP सांसदों ने सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर नहीं ली शपथ

Tue, 17 Feb 2026 04:01 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार रहे मोहम्मद यूनुस की देश की शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव की मंशा अधर में लटक गई है। दरअसल बीएनपी सांसदों ने सांविधानिक सुधार परिषद पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जानिए क्या होगा इसका असर...
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मोहम्मद यूनुस और तारिक रहमान - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बड़ी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नए सांसदों ने मंगलवार को ढाका में राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाजा में पद की शपथ ली। इसके साथ ही बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। तारिक रहमान ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार रहे मोहम्मद यूनुस को तगड़ा झटका दिया है। दरअसल, बीएनपी सांसदों ने सांविधानिक सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर शपथ नहीं ली है। 
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बीएनपी सांसदों ने सांविधानिक सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर नहीं ली शपथ
  • मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने मंगलवार सुबह देश के संविधान के अनुसार सांसदों को शपथ दिलाई। दरअसल, 12वीं संसद के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का पद खाली होने की वजह से चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह संसद सचिवालय सचिव कनीज मौला ने करवाया।
  • बांग्लादेशी मीडिया ने जानकारी दी है कि बीएनपी सांसदों ने सांविधानिक सुधार परिषद के सदस्यों के तौर पर शपथ नहीं ली। बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने ढाका-17 चुनाव क्षेत्र से सांसद के तौर पर शपथ ली। इस दौरान उनकी पत्नी, जुबैदा रहमान और उनकी बेटी जाइमा रहमान शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थीं।
  • 2024 में शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार और 30 राजनीतिक दलों ने मिलकर संवैधानिक, चुनावी और प्रशासनिक सुधारों की एक योजना पेश की जुलाई 2025 में पेश की थी।
  • बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में बीएनपी नेता सलाउद्दीन अहमद ने कहा कि पार्टी चीफ तारिक रहमान के कहने पर बीएनपी के सभी नए चुने गए सांसदों को संविधान सुधार परिषद फॉर्म पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि उन्हें परिषद का सदस्य नहीं चुना गया था।
  • दूसरी ओर, बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) समेत 11 पार्टियों के गठबंधन के नए चुने गए सांसद शपथ न लेने पर विचार कर रहे थे। हालांकि, जमात के चुने गए सांसदों को उसी जगह पर शपथ दिलाई गई है।


जुलाई चार्टर क्या है
  • जुलाई चार्टर एक प्रस्ताव है, जिसके तहत बांग्लादेश की शासन व्यवस्था में कथित सुधार किया जाना था। इसके लिए सबसे पहले सभी चुने हुए सांसदों को संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेनी थी।
  • जिसके बाद जुलाई चार्टर को लागू करने की कवायद आज से ही शुरू होनी थी। हालांकि बीएनपी सांसदों द्वारा इस पर हस्ताक्षर न किए जाने के बाद यह फिलहाल अटक गई है।
  • जमात ए इस्लामी ने भी इसे मानने से इनकार कर दिया है। जमात के नेताओं का कहना है कि बीएनपी की तरह ही हमारे भी सांसद इस पद की शपथ नहीं लेंगे। हम अपने तरीके से काम करेंगे।
  • जुलाई चार्टर लागू होने के बाद बांग्लादेश में 100 सीटों वाला उच्च सदन बनाने, प्रधानमंत्री के दूसरे पद पर नहीं रहने, प्रधानमंत्री द्वारा जजों की नियुक्ति नहीं कर सकेंगे। 
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आम चुनाव में बीएनपी ने दर्ज की बड़ी जीत
जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत भी 12 फरवरी को ही 13वें संसदीय चुनाव के साथ हुआ था, जिसमें देश के 300 में से 299 चुनाव क्षेत्रों में वोटिंग कराई गई। चुनाव में बीएनपी ने 209 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। इसके अलावा, नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने छह, निर्दलीय उम्मीदवारों ने सात सीटों, बांग्लादेश खिलाफत मजलिश ने दो, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने एक, बांग्लादेश जातीय पार्टी (बीजेपी) (अंदलीव रहमान पार्थो की लीडरशिप में) ने एक, गणाधिकार परिषद ने एक, गणसंहति आंदोलन ने एक और खिलाफत मजलिश ने एक सीट पर जीत हासिल की। ऐसे में बीएनपी के नेतृत्व वाले चुनावी गठबंधन ने कुल 212 चुनाव क्षेत्रों में जीत हासिल की, जबकि जमात के नेतृत्व वाले चुनावी गठबंधन ने 77 चुनाव क्षेत्रों में जीत हासिल की।
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