बांग्लादेश में विरोध प्रदर्श करते छात्र
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बांग्लादेश में हिंसा के बीच छात्र संगठन ने दो और दिनों के लिए विरोध प्रदर्शन को स्थगित कर दिया है। साथ ही सरकार से कर्फ्यू वापस लेने के लिए कहा है।
छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने कहा, "48 घंटों के दौरान हम कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि सरकार इंटरनेट बहाल करे, कर्फ्यू वापस ले, परिसरों को फिर से खोले और छात्र प्रदर्शनकारियों की रक्षा करे।"
आरक्षण में बदलाव की मांग के बाद हिंसक प्रदर्शन
बांग्लादेश में आरक्षण में बदलाव की मांग कर रहे छात्रों की तरफ से बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है। लेकिन ये विरोध-प्रदर्शन तब और हिंसक हो गया है। वहीं इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत और करीब तीन हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हिंसा की वजह से शिक्षण संस्थान, रेलवे, इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई है। प्रधानमंत्री शेख हसीना की तरफ से छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन और हिंसा पर लगाम लगाने के लिए सेना को भी तैनात किया गया है। इतना ही नहीं किसी भी प्रदर्शनकारी को देखते ही गोली मारने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
पहले कब हुआ विरोध, तब क्या हुआ था फैसला?
यह पहली बार नहीं है, जब बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है, इससे पहले साल 2018 में भी आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन के साथ हिंसा हुई थी। जिसके बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उच्च श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण को रद्द कर दिया। जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। लेकिन इस साल पिछले महीने यानी जून की पांच तारीख को बांग्लादेश की हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर दायर एक याचिका पर फैसला सुनाया और सरकार के आरक्षण रद्द करने के फैसले को रद्द बताया। कोर्ट के इस फैसल के बाद फिर सरकारी नौकरियों में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के सगे-संबंधियों को आरक्षण मिलना फिर से लागू हुआ था।