बांग्लादेश में 13वां आम चुनाव इस लिहाज से काफी अलग था कि लोगों ने सिर्फ नई सरकार चुनने के लिए ही वोट नहीं डाला बल्कि यह फैसला भी सुनाया कि सत्ता की राजनीति का स्वरूप क्या होना चाहिए। इसके बाद देश में राष्ट्रपति की ताकत बढ़ना तय माना जा रहा है।
दरअसल, लोगों ने जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह का बड़े पैमाने पर समर्थन करके जता दिया है कि नए प्रधानमंत्री के अधिकार सीमित होने चाहिए और संसद में ऊपरी सदन की व्यवस्था भी होनी चाहिए। बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के साथ एक जनमत संग्रह भी कराया गया। इसमें लोगों से पूछा गया था कि वे जुलाई चार्टर को लागू करने में पक्ष में हैं या नहीं।
ताजा नतीजों के मुताबिक, वोट देने वालों में से 68 फीसदी से अधिक लोगों ने इस पर सहमति जताई। दो दिग्गज महिला राजनेताओं शेख हसीना व खालिदा जिया के सियासी परिदृश्य से बाहर होने के बाद हुए इस चुनाव में लोगों ने जिस जुलाई चार्टर का खुलकर समर्थन किया, उसमें यह भी कहा गया है कि संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए।
जुलाई चार्टर सांविधानिक बदलावों पर अमल करने के जुड़ा 28 पृष्ठ का एक राजनीतिक समझौता है जिस पर 25 राजनीतिक दलों और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य बांग्लादेश को भविष्य में तानाशाही राजनीति की वापसी को रोकना है। 2024 के विद्रोह के बाद उठी मांगों के आधार पर तैयार किए गए जुलाई चार्टर के कुछ प्रावधान तो सरकारी आदेशों के जरिये लागू हो सकते हैं लेकिन कुछ में संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी।
संसद के दो सदन, विपक्ष को डिप्टी स्पीकर पद समेत 84 सुधार प्रस्तावित
जनमत संग्रह देश के सभी 64 जिलों में कराया गया था, जिसे शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में भरपूर समर्थन मिला। इसमें कुल मिलाकर 84 सुधारों का प्रावधान किया गया। माना जा रहा है कि नई सरकार गठन के बाद एक परिषद का गठन किया जाएगा ताकि 180 दिन में इन बदलावों को लागू किया जा सके।
प्रस्तावित सुधारों पर एक नजर...
प्रधानमंत्री की शक्तियों पर सीमा तय
कार्यकाल: कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में 10 वर्ष (या दो कार्यकाल) से अधिक समय प्रधानमंत्री नहीं रह सकता।
दोहरी भूमिका नहीं: प्रधानमंत्री एक साथ पार्टी प्रमुख और सरकार प्रमुख की भूमिका में नहीं रह सकता।
आपातकाल: प्रधानमंत्री अब अकेले आपातकाल की घोषणा नहीं कर सकता; इसके लिए मंत्रिमंडल और विपक्षी नेता की लिखित सहमति आवश्यक होगी।
संसदीय सुधार
द्विसदन व्यवस्था: संसद के दो सदन होंगे। मौजूदा जातीय संसद निचला सदन बन जाएगी और 100 सदस्यों वाला ऊपरी सदन (सीनेट) बनाया जाएगा।
अनुच्छेद 70 का उन्मूलन: अपनी पार्टी के विरुद्ध मतदान करने वाले सांसद की बर्खास्तगी के विवादास्पद नियम को या तो हटा दिया जाएगा या इसे कमजोर कर दिया जाएगा।
प्रमुख नियुक्तियां: राष्ट्रपति को कई अहम नियुक्तियों का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त होगा।
विपक्ष की भूमिका: संसद के डिप्टी स्पीकर का मुख्य विपक्षी दल से चुना जाना अनिवार्य होगा।
महिलाओं का प्रतिनिधित्व: महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाकर 100 की जाएगी।
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चुनावी सुधार और कार्यवाहक सरकार
- कार्यवाहक सरकार: आम चुनाव की देखरेख के लिए एक गैर-पक्षपातपूर्ण कार्यवाहक सरकार की बहाली होगी।
- मतदान: कागजी मतपत्र अनिवार्य; इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों को विश्वास संबंधी मुद्दों के कारण बड़े पैमाने पर अस्वीकार किया गया है।
- चुनाव आयोग: पुनर्गठन किया जाएगा जिसमें संसदीय समिति की तरफ से स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
- राष्ट्रीय पहचान: गैर-बंगाली स्वदेशी समूहों को शामिल करने के लिए नागरिकों की आधिकारिक राष्ट्रीयता बंगाली से बदलकर बांग्लादेशी की जाएगी।