बांग्लादेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बंग बंधु शेख मुजीब जन्म शती समारोह में हसीना सरकार की ओर से भेजे गए निमंत्रण के विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किए जाने का विरोध जताने के लिए हटिया में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। इसमें कम से कम 12 लोग जख्मी हो गए। झड़प के दौरान जख्मी होने वालों में चार पुलिसवाले भी हैं।
बांग्लादेश के दक्षिणी हिस्से में हटिया द्वीप में देर रात प्रदर्शनकारी हिंसक हो उठे। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी को मुस्लिम विरोधी करार देते हुए रास्ता जाम कर दिया। बीते दिनों दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान 47 लोगों की मौत को लेकर विरोध जताने के लिए यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था।
स्थानीय निवासी इफ्तिखार हुसैन के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को वापस जाने के लिए कहा। लेकिन इस दौरान प्रदर्शनकारी मोदी विरोधी नारे लगा रहे थे। पुलिस ने बल प्रयोग किया तो जवाब में भीड़ ने भी पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक उसके चार जवान पत्थरबाजी में जख्मी हुए हैं और उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बांग्लादेश में तमाम विरोधी गुट मोदी को शेख मुजीबुर्रहमान की जन्मशती समारोह में 17 मार्च को ढाका बुलाए जाने को लेकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि दिल्ली में जिस तरह की हिंसा हुई है उससे पीएम मोदी की छवि मुस्लिम विरोधी बन गई है और ऐसे में बांग्लादेश सरकार को उन्हें अपने देश नहीं बुलाना चाहिए।
उधर, 46 इस्लामी संगठनों के मोर्चे ने सरकार से मांग की है कि वह मोदी को भेजे गए न्यौते को वापस लें। इस मोर्चे ने ऐलान किया है कि हर शुक्रवार जुमे की नमाज के बाद पूरे बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि दो दिन पहले ही बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती जाएगी।
बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा था कि सीएए भारत का अंदरूनी मामला है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से दोस्ताना रिश्ते रहे हैं, साथ ही आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते भी मजबूत रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को सरकार हर हाल में रोकेगी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करेगी। जाहिर है अपने घरेलू प्रदर्शनों को देखते हुए बांग्लादेश सरकार भी बेहद दबाव में है, लेकिन भारत से अपने रिश्ते किसी भी हाल में वह बिगाड़ना नहीं चाहती।