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खसरा संकट ने खोली बांग्लादेश की पोल: स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियां उजागर, रिपोर्ट में दी गई गंभीर चेतावनी

Sat, 25 Apr 2026 07:19 PM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

Bangladesh Measles Vaccine Crisis: इस रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि संस्थागत स्थिरता बहाल की जाए, वैक्सीन खरीद प्रक्रिया को फिर से सुव्यवस्थित किया जाए, खाली पदों को तुरंत भरा जाए, रिसर्च और निगरानी प्रणाली में निवेश किया जाए तथा लगातार संवाद के जरिए जनता का भरोसा दोबारा जीता जाए।
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बांग्लादेश में खसरा संकट - फोटो : IANS
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विस्तार
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बांग्लादेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, जिसे दशकों में मजबूत बनाया गया था, अब गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वर्षों की उपलब्धियां कुछ ही समय में खत्म हो सकती हैं। बांग्लादेश के एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मौजूदा खसरा वैक्सीन संकट कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह संस्थागत कमजोरी का संकेत है। राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज 2025 में घटकर करीब 60 प्रतिशत रह गई, जो पिछले लगभग एक दशक का सबसे निचला स्तर है। यह आंकड़ा 2010 से 2022 के बीच 85 से 92 प्रतिशत के बीच था।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश का विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) लंबे समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जाता रहा है। सरकार की प्रतिबद्धता, विकास साझेदारों के सहयोग और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों के मजबूत नेटवर्क के कारण इस कार्यक्रम ने वर्षों तक उच्च कवरेज सुनिश्चित की और टीकों से रोकी जा सकने वाली बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया।

रिपोर्ट के अनुसार, अब यह मॉडल कमजोर पड़ता दिख रहा है। टीकाकरण कवरेज में इतनी बड़ी गिरावट केवल लॉजिस्टिक समस्या नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की स्पष्ट विफलता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण प्रणाली समन्वित खरीद प्रक्रिया, स्थिर वित्तपोषण, सक्षम नेतृत्व और भरोसेमंद कार्यबल पर निर्भर करती है। जब ये सभी तत्व एक साथ प्रभावित होते हैं, तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। रिपोर्ट में 2025 में हेल्थ, पॉपुलेशन एंड न्यूट्रिशन सेक्टर प्रोग्राम (एचपीएनएसपी) को बिना ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के समाप्त किए जाने को गंभीर नीतिगत विफलता बताया गया है।
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इसके अलावा, 37 जिलों में ईपीआई के लगभग 45 प्रतिशत फील्ड पद खाली पड़े हैं। ये कर्मचारी करीब 1.5 लाख टीकाकरण केंद्रों का संचालन करते हैं, जो पूरे कार्यक्रम की रीढ़ हैं। उनके बिना टीकाकरण कवरेज में गिरावट तय है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कोल्ड चेन बनाए रखने वाले वैक्सीन पोर्टरों को महीनों तक वेतन नहीं मिला, जिसके चलते असंतोष फैला और देशव्यापी हड़ताल हुई।

रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि संस्थागत स्थिरता बहाल की जाए, वैक्सीन खरीद प्रक्रिया को फिर से सुव्यवस्थित किया जाए, खाली पदों को तुरंत भरा जाए, रिसर्च और निगरानी प्रणाली में निवेश किया जाए तथा लगातार संवाद के जरिए जनता का भरोसा दोबारा जीता जाए। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए, तो मौजूदा दबाव बड़े संकट में बदल सकता है, जिसकी कीमत आर्थिक और मानवीय दोनों स्तरों पर बहुत अधिक होगी।
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-इनपुट आईएएनएस
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