पश्चिम एशिया तनाव में इन दिनों भारी तनाव और संघर्ष का माहौल है। दुनिया भर के देश इस तनाव के परिणामों को लेकर बेहद चिंतित हैं। इस युद्ध के मैदान में पाकिस्तान सीधे तौर पर तो शामिल नहीं है, लेकिन वहां पैदा होने वाली हर हलचल का सीधा और गहरा असर उस पर पड़ रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा कमजोर है कि वह वैश्विक स्तर पर होने वाले किसी भी बड़े बदलाव या बाहरी झटके को सहने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है। एक नई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट पाकिस्तान की पहले से खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को और भी गहरे गर्त में धकेल सकता है।
बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब भी दुनिया में कोई बड़ा भू-राजनीतिक संघर्ष होता है, तो उसका शुरुआती असर ग्लोबल वित्तीय बाजारों पर पड़ता है। लेकिन पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके घरेलू हालात पर बहुत गहरी और स्थायी चोट करता है। कई मजबूत देशों के लिए ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी, कड़े वित्तीय हालात या मुद्रा के दबाव को संभालना एक आम बात हो सकती है। लेकिन पाकिस्तान के लिए यही सब एक बड़ा आर्थिक संकट बन जाता है। इन बाहरी झटकों के कारण पाकिस्तान का आयात बिल तेजी से बढ़ता है, महंगाई आसमान छूने लगती है और उनकी मुद्रा (रुपया) की कीमत लगातार गिरने लगती है, जिससे पूरी घरेलू अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा जाती है।
क्या तेल की बढ़ती कीमतें पाकिस्तान को पूरी तरह डुबो देंगी?
इस रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि पाकिस्तान अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। वित्त वर्ष 2023 में पाकिस्तान का पेट्रोलियम आयात बिल लगभग 18 अरब डॉलर के विशाल आंकड़े तक पहुंच गया था। अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सिर्फ 10 डॉलर प्रति बैरल का भी लगातार इजाफा होता है, तो पाकिस्तान के आयात खर्च में हर साल 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। पाकिस्तान के पास पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी है, और यह नया खर्च उस पर जानलेवा दबाव डालेगा। इससे न केवल पाकिस्तानी रुपया कमजोर होगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल और बिजली महंगी होने से देश में राजनीतिक अस्थिरता भी फैलेगी।
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पाकिस्तान अपने ऊर्जा संसाधनों का सही इस्तेमाल कर पा रहा?
रिपोर्ट के अनुसार, इस गंभीर संकट से बचने के लिए पाकिस्तान को ऊर्जा के दूसरे विकल्पों पर ध्यान देना होगा। पाकिस्तान में सौर और पवन ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। सिंध में तेज हवाओं और बलूचिस्तान व दक्षिणी पंजाब में तेज धूप के चलते वह बहुत ज्यादा बिजली बना सकता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी क्षमता होने के बावजूद, पाकिस्तान के कुल ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत ही है। पिछले एक दशक में बार-बार देखा गया है कि तेल की कीमतों और ब्याज दरों में होने वाले वैश्विक उतार-चढ़ाव ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को इसी तरह से नुकसान पहुंचाया है।
डॉलर पर भारी निर्भरता पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा?
इस रिपोर्ट में एक और बड़ी खामी की ओर ध्यान दिलाया गया है। पाकिस्तान के पास मुश्किल वक्त के लिए पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (रिजर्व) की भारी कमी है। अभी पाकिस्तान के पास जो तेल का भंडार है, वह सिर्फ कुछ हफ्तों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। अगर दुनिया भर में तेल की आपूर्ति बाधित होती है, तो पाकिस्तान तुरंत गहरे संकट में आ जाएगा। रिपोर्ट में यह अहम सुझाव दिया गया है कि इस भंडार को बढ़ाकर कम से कम 30 से 45 दिनों का किया जाना चाहिए। इसके अलावा, डॉलर में होने वाले व्यापार पर पाकिस्तान की बहुत ज्यादा निर्भरता भी उसके लिए बड़े जोखिम का कारण बन रही है।
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