Bangladesh Elections: बांग्लादेश में हर दिन के साथ आम चुनाव के लिए प्रचार जोर पकड़ रहा है। वहीं आंतरिक सर्वे में कट्टर जमात-ए-इस्लामी सरकार बनाने के करीब नजर आ रही है। सर्वे के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी बीएनपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर रही है।
बांग्लादेश में अवामी लीग प्रमुख व अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बिना अगले माह होने जा रहे आम चुनावों के लिए बुधवार से प्रचार शुरू हो गया। इन चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक हाल ही में हुए दो अलग-अलग आंतरिक सर्वेक्षण में लंबे समय तक राजनीति से बाहर रही कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी पहली बार सरकार बनाने के बेहद नजदीक पहुंचती नजर आ रही है।
पाकिस्तान समर्थक है जमात-ए-इस्लामी
जमात को पाकिस्तान समर्थक माना जाता है और उसने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का भी विरोध किया था। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को कड़ी टक्कर दे रही है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को 300 सीटों संसदीय चुनाव होंगे। जमात को देश की आजादी के बाद 1972 में प्रतिबंधित भी कर दिया गया था, जिसे 1975 में हटाया गया और 1979 में जियाउर रहमान के शासन में पार्टी को चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिली।
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धर्मनिरपेक्ष बुनियाद को चुनौती
जमात-ए-इस्लामी को लंबे समय से धर्मनिरपेक्ष समूहों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। उसकी नीतियां बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष बुनियाद को चुनौती मानी जाती हैं। जन-आंदोलन के दौरान छात्र नेताओं द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) भी इस गठबंधन का हिस्सा है। 2024 में हिंसक दमन के बीच हसीना के पांच अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत चले जाने के तीन दिन बाद यूनुस ने पद संभाला, उन पर भी एक पक्ष को प्रमुखता देने के आरोप हैं।
रहमान पीएम पद के अहम दावेदार
बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। उनकी पार्टी को उनकी मां की राजनीतिक विरासत के कारण मजबूत समर्थन मिला है। खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हो गया था। रहमान 17 वर्षों के निर्वासन के बाद पिछले महीने ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे हैं। तारिक रहमान ने बृहस्पतिवार को सिलहट में रैली की।