अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य पदार्थों, ईंधन और कच्चे माल के भाव में भारी बढ़ोतरी के कारण बांग्लादेश के आयात बिल में भारी वृद्धि हुई है। ऐसे में शेख हसीना वाजेद के नेतृत्व वाली आवामी लीग सरकार के सामने कुआं या खाई में से किसी एक को चुनने की चुनौती खड़ी हो गई है। डॉलर के महंगा होने के कारण भी बांग्लादेशी टका दबाव में है। ऐसे में समझा जा रहा है कि बांग्लादेश सरकार ने कृत्रिम रूप से टका को महंगा बना रखा है। लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञों की राय है कि बांग्लादेश ज्यादा समय तक मुद्रा के अवमूल्यन से नहीं बच पाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन और कच्चा माल महंगा होने के कारण देश के कारखानों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसलिए निर्यातक बांग्लादेश की मुद्रा के अवमूल्यन की मांग कर रहे हैं, ताकि विदेशी बाजार में उनका तैयार माल ज्यादा महंगा ना हो। अखबार डेली स्टार के विश्लेषक एकेए जमीरउद्दीन ने एक टिप्पणी में लिखा है- ‘ज्यादातर आयात निर्भर देशों की तरह बांग्लादेश के सामने भी कठिन चयन की चुनौती खड़ी हो गई है। एक रास्ता यह है कि तुरंत तेज दर से टका का अवमूल्यन कर दिया जाए या फिर दूसरा विकल्प है कि अवमूल्यन न करने के उन परिणामों का सामना किया जाए, जिनके बारे में अभी कोई भी भविष्यवाणी कर सकने की स्थिति में नहीं है।’
बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार हाल में घटा है। इसे देखते हुए बांग्लादेश बैंक (देश के सेंट्रल बैंक) ने पिछले हफ्ते बैंकों को निर्देश दिया था कि वे लग्जरी और गैर जरूरी वस्तुओं के आयात के मामलों में 75 फीसदी अग्रिम भुगतान करेँ। लेकिन मंसूर ने कहा है कि इससे लंबी अवधि में कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि डॉलर की कीमत अभी लगातार चढ़ने की संभावना है।