पिछले कुछ महीनों में भारत और बांग्लादेश के संबंधों में आए गतिरोध को दूर करने के लेकर विदेश मामलों के सलाहकार (बांग्लादेश) मोहम्मद तौहीद हुसैन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में आए गतिरोध को दूर करने में सक्षम होंगे। उनका बयान भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की सोमवार को बांग्लादेश यात्रा से पहले आई। आठ अगस्त को बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद यह भारत सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहली यात्रा होगी।
भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों पर क्या बोला बांग्लादेश
बांग्लादेश में विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा, "हमें उम्मीद है कि हम इस गतिरोध को दूर करने में सफल होंगे। ऐसे गतिरोध को दूर करने के लिए एक-दूसरे से मिलना बहुत जरूरी है। मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच सार्थक चर्चा होगी।" उन्होंने आगे कहा, "भारत और बांग्लादेश के संबंधों के बीच पांच अगस्त के बाद से बदलाव देखने को मिला। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों में द्विपक्षीय व्यापारिक गतिविधियों के मामले में जो मंदी देखी गई, उसका असर दोनों दोनों पक्षों पर ही पड़ा है।"
बांग्लादेश के विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद रफीकुल आलम ने बताया कि भारत के साथ चर्चा के दौरान दोनों देशों के संबंधों के सभी एजेंडों को सामने रखने का प्रयास किया गया। व्यापार, सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और पानी के मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव आ गया। हाल के हफ्तों में हिंदुओं पर हमलों और इस्कॉन के पुजारी चिन्मय दास की गिरफ्तारी को लेकर रिश्ते और भी खराब हो गए हैं। बता दें कि पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के कारण भारत में चिंता बढ़ गई। इस पर भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने 29 नवंबर को प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था," इस मामले पर हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है। अंतरिम सरकार को सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।" भारत को उम्मीद है कि देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार चिन्मय दास से संबंधित मामले को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निपटाया जाएगा।
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