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Bangladesh: आईएमएफ ने मरहम लगाया, पर अपनी मुश्किलों का हल खुद ढूंढना होगा बांग्लादेश को

Fri, 03 Feb 2023 01:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

Bangladesh: आईएमएफ के इस फैसले पर खुशी जताते हुए बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने कहा- ‘आईएमएफ के इस फैसले से यह साबित हो गया है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है, यह कई अन्य देशों से अधिक मजबूत है।’
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IMF Bangladesh - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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बांग्लादेश को इस हफ्ते एक बड़ी राहत मिली, जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बोर्ड ने उसे 4.7 बिलियन डॉलर का कर्ज भुगतान करने को मंजूरी दे दी। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस राहत से बांग्लादेश की आर्थिक मुश्किलें हल नहीं होंगी। ये समस्याएं अब काफी गंभीर रूप ले चुकी हैं।

बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि मंजूर हुए कर्ज की रकम दस फरवरी तक उन्हें मिल जाएगी। आईएमएफ के इस फैसले पर खुशी जताते हुए बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने कहा- ‘आईएमएफ के इस फैसले से यह साबित हो गया है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है, यह कई अन्य देशों से अधिक मजबूत है।’ उनका इशारा संभवतः पाकिस्तान और श्रीलंका की तरफ था, जिनके लिए मंजूर कर्ज की रकम दिए जाने पर फिलहाल आईएमएफ ने रोक रखी है।

लेकिन अर्थशास्त्री इस घटनाक्रम पर वित्त मंत्री जितने उत्साहित नहीं हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि बांग्लादेश को कर्ज की पहली किस्त के रूप में 47 करोड़ 60 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि देश को हर महीने 1.5 बिलियन डॉलर आयात बिल के रूप में चुकाने पड़ रहे हैं। थिंक टैंक पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ बांग्लादेश के कार्यकारी निदेशक एच मंसूर ने कहा है- ‘आईएमएफ से मिली मदद फ़ौरी तौर पर समस्या का आंशिक समाधान है। लेकिन वास्तिवक समाधान तो नीतियों में बदलाव लाकर ही हो सकता है।’

बांग्लादेश के आर्थिक संकेतक (इंडिकेटर) एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। कुछ संकेतक स्थिति में सुधार की झलक दे रहे हैं। मसलन, पिछले नवंबर और दिसंबर में बांग्लादेश को कुल निर्यात से होने वाली आमदनी में तेजी से सुधार हुआ। लेकिन वस्त्र के मुख्य निर्यात की स्थिति अच्छी नहीं है। बांग्लादेश गारमेंट मैनुफैक्चरर्स एंड एक्सोपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष फारूक हसन के मुताबिक पिछले वस्त्र निर्यात के ऑर्डर में 30 फीसदी गिरावट आने का संकेत मिला है। देश में विदेशी मुद्रा आने का एक और प्रमुख स्रोत विदेशों में रहने वाले बांग्लादेशियों की तरफ से भेजी जाने वाली रकम है। इसमें भी हाल के महीनों में सुधार हुआ है।

लेकिन कई मोर्चों पर सरकार के सामने ऐसे फैसले लेने की चुनौती बनी हुई है, जिससे सत्ताधारी पार्टी लोगों में अलोकप्रिय हो सकती है। इस चुनावी साल में ऐसे निर्णय लेना प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की सरकार के लिए आसान नहीं होगा। पहले ही सब्सिडी में लगातार कटौती से गैस, केरोसीन, बिजली और पानी के शुल्कों में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। सरकार ने बिजली की कीमत में जनवरी में पांच प्रतिशत का इजाफा किया था। इस बुधवार को इसमें फिर 5.07 प्रतिशत की वृद्धि की गई।

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मंसूर ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा कि आखिरकार सरकार को हर तरह के मूल्य नियंत्रण, ब्याज दर और विनिमय दर आदि के नियंत्रण से पूरी तरह बाज आना होगा। पहले आईएमएफ में काम कर चुके मंसूर ने कहा कि ये नीतियां हमारी अर्थव्यवस्था में एक बड़ी समस्या बन चुकी हैं।

थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग में फेलॉ देबप्रिया भट्टाचार्य ने कहा है- ‘समाधान के लिए हमें बड़े पैमाने पर सुधार करने होंगे। वरना आर्थिक वृद्धि समस्याग्रस्त बनी रहेगी।’ उन्होंने कहा कि ऐसे सुधारों के लिए देश में संभावनाएं बहुत उज्ज्वल नजर नहीं आ रही हैं।

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