पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने ट्रेन को हाईजैक किया।
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पाकिस्तान में एक पूरी ट्रेन हाईजैक होने की खबर सामने आई है। बताया गया है कि बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से करीब 100 किलोमीटर दूर बोलन स्टेशन पर बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के उग्रवादियों ने ट्रेन को बंदूक के दम पर अगवा कर लिया। ट्रेन में सैकड़ों यात्रियों की मौजूदगी की बात कही गई है। बीएलए ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के छह जवानों को मार गिराने की बात भी कही है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) क्या है? इस संगठन का क्या इतिहास रहा है? इसका नेतृत्व कौन कर रहा है? इसके अलावा बीएलए के लड़ाकों की विचारधारा क्या है और यह संगठन बीते दिनों में किस तरह पाकिस्तान और चीन को निशाना बना रहा है? आइये जानते हैं...
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बताया जाता है कि पाकिस्तान से अलग बलूचिस्तान के लिए आंदोलन सोवियत संघ और कट्टरपंथी मार्क्सवादी विचारधारा से प्रेरित है। इतना ही नहीं बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे कई लड़ाकों की ट्रेनिंग भी मॉस्को में हुई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी क्षेत्र की आजादी के लिए इसी विचारधारा से प्रेरित बताई जाती है। उसके लड़ाकों की युवा पीढ़ी भी बलूच क्रांतिकारियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है।
बीएलए का नेतृत्व कौन कर रहा है?
बलूचिस्तान में बीएलए की गतिविधियों को जबरदस्त समर्थन प्राप्त है। हालांकि, खुले तौर पर यहां लोग बलूच लिबरेशन आर्मी के समर्थन में खड़े नहीं दिखाई देते। इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान सरकार ने बीएलए से बात करने की जगह 2006 में ही इस संगठन को बैन कर दिया। तब से लेकर अब तक बीएलए पाकिस्तानी सरकार के नुमाइंदों को निशाना बनाती आ रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी की बनावट कुछ इस तरह की रही है कि इस संगठन ने अलग-अलग स्तर पर कई प्रमुख तैनात किए हैं। इस संगठन को सबसे लंबे समय तक चलाने वालों में असलम बलूच का नाम सबसे आगे है।
इतिहास की बात करें तो असलम बलूच 2006 से 2018 तक इस संगठन का प्रमुख रहा। हालांकि, 2018 में अफगानिस्तान के कंधार में एक आत्मघाती हमले में असलम की मौत हो गई थी। इस घटना से बीएलए को बड़ा झटका लगा था। हालांकि, संगठन ने इसके बाद से खुले तौर पर कभी अपने नेतृत्व में शामिल लोगों का एलान नहीं किया। बताया जाता है कि बलूचिस्तान में स्थानीय कमांडर ही दस्तों के संचालन का जिम्मा उठाते हैं।
बताया जाता है कि बलूच नेतृत्व के ज्यादातर बड़े चेहरे अभी पाकिस्तान से बाहर रह रहे हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान में रह कर संगठन का नेतृत्व कर रहे चेहरों को पाकिस्तानी सेना लगातार निशाना बनाती रही है। बताया जाता है कि असलम बलूच को अफगानिस्तान में निशाना बनाने के पीछे भी पाकिस्तानी सेना का ही हाथ था।