यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास कई अहम इलाकों पर फिर कब्जा कर लिया है। यमनी अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के साथ गठबंधन वाली सेनाओं ने जलडमरूमध्य के ठीक उत्तर में स्थित शहर धुबाब को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया है। उन्होंने बाब और हदीद शहरों पर भी कब्जा कर लिया है। इन अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि उन्हें पत्रकारों से बात करने की आधिकारिक अनुमति नहीं थी। चश्मदीदों ने बताया कि उन्होंने टैंकों और सैनिकों को इन शहरों में प्रवेश करते देखा। सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हवाई हमलों से सरकारी बलों को समर्थन दे रहा है। इस सैन्य अभियान में 100 लड़ाकू विमान शामिल हैं।
हूती विद्रोहियों ने इससे पहले क्या दावा किया था?
यह सैन्य अभियान ऐसे समय शुरू हुआ, जब हूतियों ने कहा था कि उन्होंने यमन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में और ज्यादा इलाकों पर कब्जा कर लिया है। हूती विद्रोहियों ने इस क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण शहर पर भी कब्जा करने का दावा किया था। यह सऊदी समर्थित बलों के लिए बड़ा झटका था। हूती इस इलाके की एक रणनीतिक प्रांतीय राजधानी की ओर आगे बढ़ रहे थे।
बाब अल-मंदेब को लेकर क्या कहा गया?
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि 100 लड़ाकू विमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की हूतियों के खिलाफ लड़ रही सेनाओं को हवाई मदद दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन ने रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को हवाई सुरक्षा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि जारी सैन्य अभियान के तहत हूतियों के सैकड़ों ठिकानों को नष्ट किया गया है।
अमेरिका ने कार्रवाई पर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि उम्मीद थी कि यमन में सऊदी समर्थित सरकार विद्रोहियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगी। इसका मकसद उसके कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना है।
जब रुबियो से पूछा गया कि क्या सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह कार्रवाई अमेरिका के साथ मिलकर की है, तो उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच रक्षा समझौता है। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया।
रुबियो ने कहा कि हूती विद्रोहियों के अभियान के कारण यमनी सरकार ने अपने कुछ इलाकों पर नियंत्रण खोया है। सऊदी अरब पर भी हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को अपनी रक्षा करने का अधिकार है।
क्षेत्रीय अधिकारी और एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के जारी अभियान में मदद की है। दोनों अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी। उन्हें पत्रकारों से बात करने की अनुमति नहीं थी।
अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी मदद में खुफिया जानकारी साझा करना, निशाने की पहचान करना और सैन्य अभियान की योजना बनाने में सहायता देना शामिल था। यमन युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन किया था। हालांकि, बाद के वर्षों में अमेरिका इस गठबंधन से अलग हो गया था।
सऊदी राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की चेतावनी दी। दूतावास ने संभावित ड्रोन या मिसाइल हमलों को लेकर सावधान रहने को कहा।
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अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरयानी ने बताया कि सऊदी हवाई समर्थन के साथ बलों ने तट के पास तेजी से आगे बढ़कर दुबाब क्षेत्र में अहम ठिकानों पर कब्जा किया। दुबाब हवाई पट्टी भी कब्जे में ले ली गई और इलाके में बचे हूती विद्रोहियों का संपर्क काट दिया गया। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की हवाई सुरक्षा की जा रही है। इस अभियान में सैकड़ों हूती ठिकाने नष्ट हुए हैं। सरकारी सूत्र ने बताया कि जलडमरूमध्य के पास सैन्य अड्डे पर लड़ाई जारी है। वहीं, हूती समूह ने सरकारी बलों की बढ़त के दावे को पूरी तरह गलत बताया है। यह कार्रवाई हूतियों के रविवार को तुरबह शहर पर कब्जे के बाद हुई।
सऊदी में सेना की तैनाती पर मक्का गठबंधन में सहमति
मक्का रक्षा समझौता से जुड़े देशों ने सऊदी अरब और उसके पवित्र स्थलों पर हमलों का त्वरित जवाब देने का फैसला किया है। इस गठबंधन के सदस्य देशों पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की सोमवार को हुई बैठक में सऊदी अरब में सैन्य बलों की त्वरित तैनाती पर सहमति जताई गई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त बयान के अनुसार, यह फैसला तीनों देशों के बीच हाल ही में हुए सुरक्षा सहयोग समझौते के तहत लिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे से सऊदी अरब की सीमाओं की रक्षा करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।
ईरानी खौफ से ब्रिटेन से भागे अमेरिकी बॉम्बर्स?
दक्षिणी इंग्लैंड स्थित ब्रिटिश एयरबेस 'आरएएफ फेयरफोर्ड' पर ईरान समर्थित साजिश के नए इनपुट मिलने के बाद अमेरिका ने सप्ताहांत में अभूतपूर्व जल्दबाजी दिखाते हुए अपने सभी 12 बी-1 बॉम्बर्स (बॉम्बर विमानों) को वहां से हटा लिया है। युद्ध क्षेत्र से हजारों मील दूर किसी सहयोगी देश के बेस से इस तरह अचानक और तेजी से लड़ाकू विमानों की वापसी बेहद असामान्य मानी जा रही है।
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमानों और उनके क्रू को इतनी आपात स्थिति में रवाना किया गया कि उनके लिए हवा में ईंधन भरने वाले (एरियल रिफ्यूलिंग) टैंकर विमानों की व्यवस्था भी रास्ते में ही की जा सकी। रविवार तक कम से कम तीन विमान साउथ डकोटा स्थित अपने होम बेस पर सुरक्षित उतर चुके थे।
पेंटागन ने की वापसी की पुष्टि
पेंटागन ने पुष्टि की है कि आरएएफ फेयरफोर्ड पर तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर्स मूल ठिकानों पर लौट रहे हैं, हालांकि उन्होंने नई चेतावनियों पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह नई जानकारी उसी खतरे का हिस्सा थी जो तीन हफ्ते पहले सामने आई थी, लेकिन पिछले 24 घंटों में कुछ विशिष्ट विवरण मिले और तत्परता की स्थिति अचानक बढ़ गई, जिसके बाद सैन्य कमांडरों ने तत्काल निकासी का फैसला लिया।