ऑस्ट्रेलिया से एक बड़ी दिलचस्प खबर सामने आई है। यहां की एक बीमा कंपनी ने 18 साल से काम कर रही एक महिला कर्मचारी को अचानक से बाहर का रास्ता दिखा दिया। दरअसल, कंपनी को कीस्ट्रोक तकनीक से पता चला था कि वह घर से काम करते समय पर्याप्त टाइपिंग नहीं कर रही थीं। बता दें, कीस्ट्रोक तकनीक से यह पता लगाया जा सकता है कि कीबोर्ड के बटनों को कितनी बार दबाया गया है।
पर्याप्त टाइपिंग नहीं करना पड़ा भारी
महिला ने कंपनी पर लगाया आरोप
एफडब्ल्यूसी ने निर्णय देते हुए कहा कि शेखो को इस साल की फरवरी में समय सीमा पूरी न करने, मीटिंग में अनुपस्थित रहने, संपर्क से बाहर रहने और एक कार्य पूरा करने में विफल रहने के कारण नौकरी से बाहर निकाल दिया गया था। इसके बाद उद्योग नियामक ने आईएजी पर जुर्माना लगाया था। वहीं, एक महीने बाद महिला ने कंपनी पर आरोप लगाया कि उसे नौकरी से बाहर निकालने की पहले से ही योजना बनाई गई थी। उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के कारण उसे निशाना बनाया गया था।
घंटों-घंटों नहीं की गई टाइपिंग
इतना ही नहीं, तकनीक से यह भी पता चला कि महिला ने जितने दिन लॉग ऑन किया था, उनमें बहुत ही कम समय टाइपिंग की गई थी। अक्टूबर में 117 घंटों से अधिक, नवंबर में 143 घंटे और दिसंबर में 60 घंटे बिल्कुल टाइपिंग नहीं की गई थी। हालांकि, शेखो ने इससे मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सिस्टम संबंधी समस्याएं आने पर वह लॉग इन करने के लिए अपने लैपटॉप के अलावा अन्य उपकरणों का उपयोग करती थीं।
काम करने की अवधि बहुत ही निराशाजनक
एफडब्ल्यूसी के उपाध्यक्ष थॉमस रॉबर्ट्स ने कहा कि सबूतों से पता चलता है कि महिला कर्मचारी ने निर्धारित कार्य घंटों के दौरान काम नहीं किया। इसलिए उनकी याचिका को खारिज किया जाता है। उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि आवेदक को नौकरी से निकालने के पीछे का कारण कुछ और होगा। उनके काम करने की अवधि बहुत ही निराशाजनक है।