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ऑस्ट्रेलिया में आम चुनाव : प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की पार्टी को दूसरी बार मिली जीत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sun, 19 May 2019 10:14 AM IST
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ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन अपने परिवार के साथ - फोटो : social media

ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन की कंजर्वेटिव लिबरल्स पार्टी ने एक बार फिर आम चुनाव में जीत हासिल कर ली है। मोरिसन की पार्टी ने 151 में से 74 सीटें हासिल की हैं। जो कि बहुमत से दो सीटें कम हैं। मोरिसन ने जीत मिलने के बाद परिवार के साथ मतदाताओं का आभार प्रकट किया। उन्होंने अपनी जीत को जनता और ईश्वर का आदेश बताया है।



जीत के बाद मोरिसन ने कहा, "वो ऑस्ट्रेलिया के लोग हैं जिन्होंने कड़ी मेहमत की। एक व्यवसाय शुरू किया, परिवार शुरू किया और घर खरीदा। ये ऑस्ट्रेलिया के लोग हैं जिन्होंने बड़ी जीत हासिल की है।"


उन्होंने कहा कि उनका देश अद्भुत है और वह जल्द काम पर लौटेंगे। वह कहते हैं, "मैं हमेशा से चमत्कार में विश्वास करता हूं।" बता दें चुनावों को लेकर जितने भी ओपिनियन पोल हुए हैं, उनमें विपक्षी ऑस्ट्रेलिन लेबर पार्टी की जीत बताई जा रही थी। ऐसे में उसे जीत ना मिल पाना सभी के लिए हैरानी की बात है।


लेबर पार्टी के नेता बिल शॉर्टन ने भी हार मान ली है। उनका कहना है, "मुझे पता है कि आप सबको ठेस पहुंची है और मुझे भी पहुंची है। राजनीति विचारों की लड़ाई है।" हालांकि उन्होंने अगली बार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। माना जा रहा है कि अगली बार उनकी जगह डिप्टी तान्या प्लीबरसेक चुनाव लड़ सकती हैं।

एक दशक से किसी पीएम का कार्यकाल पूरा नहीं

देश में हर तीन साल में होने वाले आम चुनाव में 2007 के बाद से कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। इस बार देश में लंबे समय तक पीएम रहे बॉब हॉक के निधन के सिर्फ दो दिनों बाद मतदान हुए। इसमें रिकॉर्ड 1.64 करोड़ मतदाताओं ने मत डाला। 

क्या हैं मुद्दे?

यहां चुनावी मुद्दा भ्रष्टाचार या जातिगत ध्रुवीकरण नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन और अर्थव्यवस्था है जिसे मतदाता किसी भी सूरत में सुधारना चाहते हैं। 



चुनावी मुद्दों में रहन-सहन का स्तर और स्वास्थ्य सेवाएं भी शामिल हैं। पिछले एक दशक में सियासी मतभेदों के चलते अस्थिर माहौल के कारण इस बार ऑस्ट्रेलिया के चुनाव बेहद अहम माने जा रहे थे। 

मतदान करना अनिवार्य है अन्यथा जुर्माना

ऑस्ट्रेलिया का चुनाव भारत के चुनावों से बहुत हद तक अलग है। ऑस्ट्रेलिया में 1924 से ही मतदान अनिवार्य है और अगर किसी पंजीकृत योग्य मतदाता ने अपना वोट नहीं डाला तो उस पर भारतीय मुद्रा के अनुसार, करीब 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इसीलिए मतदान 90 फीसदी से अधिक ही रहता है।




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