सोलोमन द्वीप के पीएम मनासेह सोगावरे ने ताइवान से रिश्ते खत्म कर चीन से नाता जोड़ने के उनकी सरकार के फैसले को दंगों का कारण बताया और कहा कि इसके लिए विदेशी दखल जिम्मेदार है, लेकिन किसी देश का नाम नहीं लिया। सोगावरे ने कहा कि वे चीन से राजनयिक संबंध बनाने के सरकार के फैसले पर अडिग हैं और उन्होंने इसे हिंसा का एकमात्र कारण बताया।
ऑस्ट्रेलिया के पड़ोसी सोलोमन द्वीप की राजधानी होनिआरा में लगातार दो दिन तक दंगों के बाद तनाव जारी रहा। हिंसा के चलते ऑस्ट्रेलिया ने यहां आनन-फानन में सेना तैनात कर दी है।
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बिगड़े हालात के लिए विदेशी दखल जिम्मेदार
सोलोमन द्वीप के पीएम मनासेह सोगावरे ने ताइवान से रिश्ते खत्म कर चीन से नाता जोड़ने के उनकी सरकार के फैसले को दंगों का कारण बताया और कहा कि इसके लिए विदेशी दखल जिम्मेदार है, लेकिन किसी देश का नाम नहीं लिया।
सोगावरे ने कहा कि वे चीन से राजनयिक संबंध बनाने के सरकार के फैसले पर अडिग हैं और उन्होंने इसे हिंसा का एकमात्र कारण बताया। उन्होंने कहा, मैं किसी के भी आगे झुकने वाला नहीं, हम लोकतंत्र की रक्षा करेंगे। इससे पहले राजधानी होनिआरा के चायनाटाउन में हजारों लोगों ने कुल्हाड़ियों व चाकुओं के साथ मार्च किया।
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प्रदर्शनकारियों की हिंसक भूड़ पॉइंट क्रूज और दूसरे बाजारों में भी पहुंची। चाइनाटाउन में एक गोदाम को आग लगा दी गई। तंबाकू के गोदामों में भी आगजनी की खबरें हैं। इसे देखते हुए सोलोमन के पीएम की अपील पर ऑस्ट्रेलिया ने रातों रात सैन्य टुकड़ियां वहां तैनात कर दी हैं। जबकि सोगावरे के विरोधियों ने अशांति के लिए सरकारी सेवाओं की कमी और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार बताया। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मॉरिस पायने ने भी इस बात पर सहमति नहीं जताई कि अशांति के लिए दूसरे देश जिम्मेदार हैं।
हालात काफी नाजुक : ऑस्ट्रेलिया
सोलोमन में भड़की हिंसा के बाद वहां अपनी सेना भेजने वाले ऑस्ट्रेलिया की गृहमंत्री कैरन एंड्रयूज ने कहा कि उनकी तरफ से भेजे गए 100 सैनिकों का मकसद द्वीप पर कानून-व्यवस्था बनाना है, लेकिन यहां के हालात काफी नाजुक हैं। अभी तो हम यही जानते हैं कि तीन दिन से दंगे भड़के हुए हैं।
सियासी व नस्ली तनाव दशकों पुराना
लगभग सात लाख लोगों के देश सोलोमन में सियासी और नस्ली तनाव दशकों पुराना है। ताजा हिंसा तब भड़की जब बुधवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। उन्होंने संसद को घेर लिया और उसकी एक बाहरी इमारत को आग लगा दी। वे लोग प्रधानमंत्री सोगावरे के इस्तीफा मांग कर रहे हैं जबकि पीएम ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद लोग सड़कों पर उतरे और दंगा शुरू हो गया।