कंपनियों ने किया कड़ा विरोध
यह टैक्स मेटा प्लेटफॉर्म , गूगल और टिकटॉक पर लागू होगा। इस प्रस्ताव का इन कंपनियों ने कड़ा विरोध किया है। मेटा ने कहा कि समाचार संस्थान अपनी इच्छा से उनके प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा करते हैं क्योंकि उन्हें इससे फायदा होता है।
जबरन संपत्ति हस्तांतरण जैसा- मेटा
कंपनी ने बयान में कहा कि यह कहना गलत है कि हम उनकी खबरें ले लेते हैं। यह प्रस्ताव वास्तव में एक डिजिटल सर्विस टैक्स है, जो बदलते विज्ञापन उद्योग को सही तरह नहीं समझता और टिकाऊ समाचार क्षेत्र बनाने में विफल रहेगा। मेटा ने आगे कहा कि यह एक उद्योग से दूसरे उद्योग में जबरन संपत्ति हस्तांतरण जैसा है, जिसका मूल्य विनिमय से कोई सीधा संबंध नहीं है। इससे एक ऐसा समाचार उद्योग बनेगा जो सरकारी सब्सिडी पर निर्भर होगा।
यह प्रस्ताव बदलावों को नजरअंदाज करता है
वहीं गूगल ने भी इस टैक्स की आवश्यकता को खारिज किया। कंपनी ने कहा कि वह पहले से ही समाचार उद्योग के साथ व्यावसायिक समझौते कर चुकी है और यह प्रस्ताव विज्ञापन बाजार में हुए बदलावों को नजरअंदाज करता है। गूगल ने यह भी कहा कि यह नीति कुछ कंपनियों पर ही भुगतान का बोझ डालती है, जबकि माइक्रोसॉफ्ट, स्नैपचैट और ओपनएआई जैसे प्लेटफॉर्म्स को इसमें शामिल नहीं किया गया है, जबकि लोगों के समाचार देखने के तरीके में बड़ा बदलाव आ चुका है।
टिकटॉक की ओर से इस प्रस्ताव पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रस्ताव के दायरे में आने वाली सभी कंपनियां अमेरिकी हैं। अमेरिका में कुछ आलोचकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का 2021 का कानून भी अमेरिकी कंपनियों पर असमान रूप से असर डालता था।
पीएम एंथनी ने इस विरोध पर क्या कहा?
हालांकि, प्रधानमंत्री एंथनी ने संभावित अमेरिकी प्रतिक्रिया को लेकर चिंता से इनकार किया। उन्होंने कहा कि हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं और हमारी सरकार ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसले लेगी। इस तरह ऑस्ट्रेलिया एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और पत्रकारिता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है।