ऑस्ट्रेलिया के डेप्युटी चीफ ऑफ एयर फोर्स, एयर वाइस मार्शल हार्वे रेनॉल्ड्स, ने 19 नवंबर को नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया-इंडिया एयर स्टाफ वार्ता के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। एयर वाइस मार्शल रेनॉल्ड्स ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा।
ऑस्ट्रेलिया और भारत ने एक समझौता किया है जिससे रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (आरएएएफ) और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग (हवा में विमान में ईंधन भरने) की सुविधा होगी। यह घोषणा ऑस्ट्रेलिया के रक्षा उद्योग और क्षमता विकास मंत्री, पैट कॉनरॉय एमपी, और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 21 नवंबर को द्विपक्षीय वार्ता के दौरान की। इस समझौते के तहत, आरएएएफ का केसी-30ए मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान भारतीय सशस्त्र बलों के विमानों में हवा में ईंधन भर सकेगा।
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'भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध और होंगे मजबूत'
ऑस्ट्रेलिया के डेप्युटी चीफ ऑफ एयर फोर्स, एयर वाइस मार्शल हार्वे रेनॉल्ड्स, ने 19 नवंबर को नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया-इंडिया एयर स्टाफ वार्ता के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। एयर वाइस मार्शल रेनॉल्ड्स ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करेगा।
'भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए एक शीर्ष सुरक्षा भागीदार'
उन्होंने कहा भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए एक शीर्ष सुरक्षा भागीदार है, और हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से, हम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता में योगदान देने वाले व्यावहारिक और ठोस सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारतीय सशस्त्र बलों के साथ एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग की क्षमता हमारी आपसी इंटरऑपरेबिलिटी (एकसाथ काम करने की क्षमता) को बढ़ाती है और हमें कई परिस्थितियों में अधिक प्रभावी ढंग से सहयोग करने में सक्षम बनाती है।
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एयर वाइस मार्शल हार्वे रेनॉल्ड्स आगे कहा, यह समझौता हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है और हमारे कर्मियों को एक-दूसरे के साथ काम करने, ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करने और आपसी विश्वास व समझ बढ़ाने के लिए मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स भारतीय नौसेना के पी-81 नेप्च्यून निगरानी विमान के साथ प्रशिक्षण और जुड़ाव गतिविधियां भी करता है। इस समझौते से केसी-30ए के जरिए पी-81 विमानों में ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पहुंच और स्थायित्व (पर्सिस्टेंस) बढ़ेगा।