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Attari-Wagah Border: सिख श्रद्धालु पहुंचे पाकिस्तान, कुछ को बॉर्डर से ही लौटाया वापस; अब PAK ने दी सफाई

Thu, 06 Nov 2025 09:59 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान ने उन आरोपों को झूठा बताया जिनमें कहा गया था कि हिंदू श्रद्धालुओं को देश में प्रवेश से रोका गया। इसके बाद से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा कि यह आरोप भ्रामक और गलत हैं।
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शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी पीएम - फोटो : X @CMShehbaz
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विस्तार
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मंगलवार को करीब 1,900 सिख श्रद्धालुओं का जत्था गुरु नानक देव जी की जयंती मनाने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान गया था। इसी जत्थे में कुछ हिंदू श्रद्धालु भी शामिल थे। दिल्ली के रहने वाले अमरचंद नाम के व्यक्ति ने दावा किया कि उन्हें सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी रोक दिया गया। अमरचंद के मुताबिक, उनके अलावा लखनऊ के सात अन्य लोगों को भी वापस भेज दिया गया। इसके बाद मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी
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इस्लामाबाद से आज पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने इन आरोपों को झूठा, भ्रामक और आधारहीन बताया। बता दें, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक हिंदू यात्री ने दावा किया कि उसे और उसके परिवार के छह सदस्यों को सिर्फ धर्म के आधार पर वाघा बॉर्डर से लौटा दिया गया।

मामले पर क्या बोला पाकिस्तान?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने इस पूरे मामले पर कहा कि पाकिस्तान उन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है कि हिंदू समुदाय के सदस्यों को धार्मिक आधार पर प्रवेश से रोका गया। यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है।उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तियों के दस्तावेज अधूरे पाए गए थे और वे इमीग्रेशन अधिकारियों के सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके, जिसके चलते उन्हें मानक प्रक्रिया के तहत भारत लौटने को कहा गया।
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पाकिस्तान का प्रशासनिक बचाव
अंद्राबी ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई धार्मिक नहीं बल्कि प्रशासनिक कारणों से की गई थी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह पाकिस्तान के संप्रभु अधिकारों के तहत की गई सामान्य प्रक्रिया थी, जो किसी भी देश के इमीग्रेशन कानूनों का हिस्सा होती है। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा सभी धर्मों के श्रद्धालुओं का स्वागत करता रहा है, और यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
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भारतीय श्रद्धालु क्या बोले?
दिल्ली निवासी अमरचंद ने बताया कि उन्होंने और उनके परिवार ने पाकिस्तान में प्रवेश के लिए सभी जरूरी दस्तावेज पूरे किए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया। उनके मुताबिक, लखनऊ से आए सात और हिंदू श्रद्धालु भी वाघा बॉर्डर से वापस भेजे गए। इस घटना के बाद भारत में भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या वाकई धार्मिक आधार पर भेदभाव हुआ या यह केवल दस्तावेजी कमी का मामला था।


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