ईरान में 22 वर्षीय युवती महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से देशभर में हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों में कम से कम 92 लोग मारे गए हैं। नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (आईएचआर) एनजीओ के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को देश के कुर्द क्षेत्र में व्यापक रैलियां व हड़ताल हुई हैं। 2019 के बाद ईरान में यह सबसे बड़ा प्रदर्शन बन गया है जिसमें दर्जनों लोग अशांति के कारण मारे गए हैं। इससे पहले की रिपोर्ट्स में 83 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी।
महसा की मौत के खिलाफ ईरान से बाहर लंदन, रोम, मैड्रिड और अन्य पश्चिमी शहरों में भी प्रदर्शन देखे गए हैं। अमिनी को ईरान की नैतिकता पुलिस ने 'अनुपयुक्त पोशाक' के लिए गिरफ्तार किया था जिसके तीन दिन बाद ही उनकी हिरासत में मौत हो गई थी।
दक्षिण पूर्वी ईरान में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई। यह झड़प उस समय हुई जब ईरान के सुन्नी अल्पसंख्यक सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी जाहेदान में मक्की ग्रैंड मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए निकले थे।
घटना के वीडियो फुटेज भी सामने आए हैं जिनमें देखा जा सकता है कि कुछ लोग जमीन पर पड़े हुए हैं उनके घावों से खून बह रहा है। लोग उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश कर रहे हैं। मस्जिद के अंदर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में नमाजी दौड़ते हुए बाहर की ओर निकल रहे हैं, गोलियों की आवाज सुनाई दे रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य क्लिप में आसपास की सड़कों पर एक व्यक्ति को भागता हुआ नजर आ रहा है। वह पुलिस के एक वाहन पर पत्थर फेंकते और आग लगाते हुए दिख रहा है।
ईरान के अंसतुष्ट नेता हबीबुल्ला सरबाजी इन दिनों दुबई में रह रहे हैं। वह बलूचिस्तान नेशनल सॉलिडेरिटी पार्टी के महासचिव भी हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि कुछ नमाजी सरकार विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पास के पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हुए और उन्होंने पथराव किया। पुलिस ने फायरिंग कर जवाबी कार्रवाई की।
सरबाजी ने कहा कि उन्हें ईरान के अंदर के विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारी इस बात से नाराज थे कि इस महीने की शुरुआत में एक पुलिस अधिकारी ने एक किशोर लड़की का यौन उत्पीड़न किया।