पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत में शनिवार रात से हो रही भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। भीषण बारिश के चलते हुए भूस्खलन में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि इलम जिले के सूर्योदय नगर पालिका के मानेभंज्यांग में पांच लोगों की मौत हो गई। नेपाल के इलाकों में शनिवार से लगातार भारी बारिश हो रही है।
कोशी प्रांत पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता एसएसपी दीपक पोखरेल के बताया, आज सुबह तक सूर्योदय नगर पालिका में भूस्खलन में कम से कम पांच लोग, मंगसेबुंग नगर पालिका में तीन और इलम नगर पालिका में छह लोगों की मौत हो चुकी है। देउमई नगर पालिका में तीन और फक्फोकथुम ग्राम परिषद में एक व्यक्ति की मौत हुई है।
पीएम मोदी ने जताया दुख
पीएम नरेंद्र मोदी ने नेपाल में मची इस तबाही पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि नेपाल में भारी बारिश के कारण हुई जनहानि और क्षति दुखद है। हम इस कठिन समय में नेपाल की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं। उन्होंने नेपाल को मित्र पड़ोसी देश बताते हुए सहायता देने की बात पर जोर दिया।
सेना की गई तैनाती
एसएसपी पोखरेल ने बताया, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि हम नुकसान का आकलन कर रहे हैं। अभी तक हमारे पास नुकसान की अभी प्रारंभिक जानकारी है। फिलहाल नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को मौके पर तैनात कर दिया गया है। नेपाल सेना ने बचाव कार्यों के लिए एक हेलीकॉप्टर भेजा है। हालांकि, खराब मौसम के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। नेपाल के सात प्रांतों में से पांच में मानसून सक्रिय है। जिनमें कोशी, मधेशी, बागमती, गंडकी और लुम्बिनी शामिल हैं।
कई इलाकों में अलर्ट
शनिवार सुबह से ही प्रमुख नदियों के किनारे बसे इलाकों में खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि बागमती, हनुमंत, मनोहरा, धोबी खोला, विष्णुमती, नक्कु और बाल्खु नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ सड़कों तक पहुंच सकती है और बस्तियों में पानी घुस सकता है।
मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, सुनसरी, उदयपुर, सप्तरी, सिराहा, धनुषा, महोत्तरी, सरलाही, रौतहट, बारा, परसा, सिंधुली, दोलखा, रामेछाप, सिंधुपालचोक, कवरेपालंचोक, काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर, मकवानपुर और चितवन सहित कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन का बहुत अधिक खतरा है।
नेपाल ने इस वर्ष पहले औसत से अधिक मानसून की उम्मीद की थी, लेकिन वर्षा का पैटर्न बदल गया। मानसून का मौसम आमतौर पर जून से सितंबर के अंत तक रहता है, लेकिन पुनः सक्रिय होने से वापसी के चरण के दौरान भी भारी बारिश हो रही है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष लगभग 20 लाख लोग (1,997,731) और 457,145 परिवार मानसून से संबंधित आपदाओं से प्रभावित हो सकते हैं।
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