वुहान के बाहरी इलाके का एक गांव। घर के एक कमरे में एक बुजुर्ग महिला चुपचाप कुछ जाप कर रही हैं। दूसरी ओर, एक अन्य महिला सुबक रही हैं। इस साल फरवरी में कोरोना वायरस ने उनके 44 वर्षीय भाई की जान ले ली। ये महिला खुद को माफ नहीं कर पा रही हैं।
इस महिला का नाम मिस वॉन्ग और उनके भाई का नाम वॉन्ग फेई है। घर में सब उन्हें फेईफेई कहकर बुलाते थे। मिस वॉन्ग कहती हैं कि फेईफेई के अंतिम संस्कार के बाद उन्हें एक तांत्रिक के जरिए संदेश मिला, "फेईफेई को नहीं लगता कि उसकी मौत के लिए मैं जिम्मेदार हूं।" मिस वॉन्ग बताती हैं, "वो मुझे सहज कराने की कोशिश कर रहे थे और चाहते हैं कि मैं मान लूं वो अब इस दुनिया में नहीं है।"
उनके भाई ने कोविड वॉर्ड में दम तोड़ा जहां कोई उन्हें मिलने भी नहीं जा सकता था। आखिरी दिनों में उन्होंने बेबसी भरे कई संदेश भेजे। ऐसे ही एक संदेश में उन्होंने लिखा, "मैं बहुत थका हुआ महसूस करता हूं, जैसे ये बीमारी बहुत लंबे समय से चली आ रही है।"
मिस वॉन्ग का जो अपराध-बोध है, वो इस वैश्विक महामारी के सबसे भयावह पहलुओं में से एक है, जहां कोरोना संक्रमित मरीजों को उनके परिवारों से एकदम अलग-थलग कर दिया जाता है। मिस वॉन्ग ने मुझे बताया, "मैं अपने भाई की देखभाल के लिए अस्पताल भी नहीं जा पाई। जब मैंने सुना कि उसने दम तोड़ दिया है, मुझे यकीन नहीं हुआ। मेरा परिवार टुकड़ों में बिखर गया है।"
वो ये जानना चाहती हैं कि उनके भाई का इलाज किस तरह किया गया, उनकी ठीक से देखभाल की गई थी या नहीं, कहीं ऐसा तो नहीं कि अधिक प्रयासों से उसकी जान बचाई जा सकती थी? लेकिन पुलिस ने मिस वॉन्ग को विदेशी मीडिया के सामने मुंह ना खोलने की चेतावनी दी, जिसकी अनदेखी करना जोखिम-भरा है।
जिस एक महिला से हमने किसी तरह इंटरव्यू करने की कोशिश की, उसके साथ सादे कपड़ों में पुलिसवाले मौजूद थे। जब वो हमारी कार में दाखिल होने लगी, उन पुलिसवालों ने हमारा रास्ता रोक दिया। वुहान में दूसरे व्यक्ति से हम ईस्ट लेक के किनारे अंधेरे में मिले। उन्होंने हमें बताया कि पुलिस उनके पिता की मौत के बारे में बात करने के लिए दो बार घर आई थी।
वुहान में महामारी कैसे और क्यों फैली, और क्या इसकी बेहतर तरीके से रोकथाम की जा सकती थी? पीड़ितों और पत्रकारों के लिए ये सवाल पूछना आसान नहीं है। लेकिन ये किसी की पसंद-नापसंद की बात नहीं है। वैश्विक महामारी के केंद्र वुहान के बारे में ये सवाल पूछना बेहद जरूरी है।
ये 15 जनवरी के आस-पास की बात है, जब वॉन्ग फेई को लगा कि उनकी तबीयत सही नहीं है। उस समय चीन में कोरोना वायरस की वजह से मरने वालों की आधिकारिक संख्या सिर्फ तीन थी। लेकिन अब दुनिया भर में एक करोड़ 29 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। कम से कम साढ़े पांच लाख लोग दम तोड़ चुके हैं और वायरस की वजह से तमाम अर्थव्यवस्थाएं लॉकडाउन का दौर देख चुकी हैं।
वुहान ही वो जगह है जहां इस वायरस का पहली बार पता चला। यही वो जगह है जहां पहली बार इस वायरस पर काबू पाने की कोशिश हुई। यही वो जगह है जहां इस वायरस का स्रोत खोजा जाना चाहिए, ताकि सबसे बड़े अनुत्तरित सवाल का जबाव मिल सके, जिसकी वजह से अब चीन और अमरीका में प्रोपेगैंडा वॉर शुरू हो चुका है।
क्या कोरोना वायरस प्रकृति से निकला है, जैसा कि ज्यादातर वैज्ञानिक सोचते हैं, या कहीं ऐसा तो नहीं कि ये वायरस किसी प्रयोगशाला से लीक हुआ हो?
स वॉन्ग का कहना है कि उनका भाई ड्राइवर था और वुहान से शायद ही कभी बाहर गया था। उसके जीवन के 44 वर्षों के दौरान चीन का ये केंद्रीय शहर, पिछड़े औद्योगिक शहर से आगे बढ़कर इंटरनेशनल बिजनेस और ट्रांसपोर्ट का ठिकाना बन गया। लेकिन यदि वॉन्ग फेई के जीवन और वुहान में आए आमूलचूल बदलाव की तुलना की जाए तो उनके आखिरी दिन वैसे ही बीते, जिस तरह से ये शहर अपने उद्भव से आपदा तक पहुंचा।
जनवरी की शुरुआत में ही डॉक्टरों को अहसास होने लगा था कि ये बीमारी बेहद संक्रामक है और उन्होंने अपने अस्पतालों में क्वांरटीन की प्रक्रिया आरंभ कर दी थी।
लेकिन तब अधिकारी, लोगों को अलर्ट करने के बजाए हेल्थ-वर्कर्स को ही चुप करा रहे थे। ली वेनलियांग नामक एक डॉक्टर ने जब अपने सहकर्मियों को संक्रमण के बारे में चेतावनी देने की कोशिश की, तब पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोका और उनसे माफीनामा लिखवाया।