भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित करने का फैसला पाकिस्तान को ही ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा, क्योंकि पड़ोसी देश भारत के मुकाबले ज्यादा आवश्यक उत्पादों का आयात करता है। यह दावा बुधवार को भारतीय व्यापार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान की तरफ से राजनयिक संबंध घटाने की घोषणा के बाद किया।
बता दें कि भारत की तरफ से पाकिस्तान को किया जाने वाला निर्यात पहले ही इस साल फरवरी में हुए पुलवामा हमले के बाद से ठप पड़ा हुआ है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (एफआईईओ) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, व्यापारिक संबंधों को निलंबित करने से पाकिस्तान ज्यादा प्रभावित होगा, क्योंकि भारतीय उत्पादों पर पाकिस्तान की निर्भरता के मुकाबले भारत की उसके यहां से आने वाले उत्पादों पर निर्भरता कम है। पाकिस्तान की तरफ से भारत को एमएफएन दर्जा नहीं दिए जाने के कारण वहां के लिए भारत का निर्यात सीमित है। भारतीय उत्पादों के लिए दक्षिण और मध्य एशिया में बाजार खुले हुए हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (आईआईएफटी) के प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने भी कहा कि पाकिस्तान का निर्णय उसके अपने व्यापार को ही प्रभावित करेगा।
पुलवामा हमले के बाद ही गिर गया था व्यापार
फरवरी में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार निलंबित कर दिया था। भारत ने पड़ोसी देश का एमएफएन दर्जा खत्म करते हुए उसके उत्पादों पर 200 फीसदी आयात शुल्क लगा दिया था। इसके चलते मार्च, 2019 में पाकिस्तान से भारत को किए जाने वाले निर्यात में करीब 92 फीसदी की कमी आ गई थी। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, मार्च, 2018 में पाकिस्तान से भारत को 2.46 अरब रुपये का निर्यात किया गया था, जो मार्च, 2019 में घटकर महज 20.20 करोड़ रुपये का ही रह गया था।
पाकिस्तान का निर्णय अदूरदर्शी : पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने बुधवार को पाकिस्तान की तरफ से भारत के साथ राजनयिक संबंध घटाने की घोषणा को अदूरदर्शी निर्णय करार दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुर्शीद ने कहा, ताजा हालात में द्विपक्षीय संबंधों को बनए रखना बेहद अहम है। पाकिस्तान का निर्णय बेहद अदूरदर्शी है और इससे भारत को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।