नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सोमवार को इतिहास रचने जा रहा है, जब इंसान पहली बार चंद्रमा के उस रहस्यमयी हिस्से का प्रत्यक्ष दीदार करेगा, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। 53 साल से भी ज्यादा समय के बाद (1972) यह पहला अवसर होगा, जब मानव अंतरिक्ष यात्री (तीन अमेरिकी और एक कनाडाई) चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से (फार साइड) तक पहुंचेंगे।
ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर में मिशन कंट्रोल से लेकर दुनियाभर के चंद्र वैज्ञानिकों तक, सबकी नजरें करीब छह घंटे के फ्लाई-बाय पर टिकी हैं। इस फ्लाई-बाय के दौरान वैज्ञानिकों और मिशन कंट्रोल की निगाहें उन भू-वैज्ञानिक संरचनाओं और क्रेटर (ग्रह या उपग्रह की टक्कर से बना गड्ढा) पर टिकी रहेंगी, जो अब तक सिर्फ रोबोटिक मिशनों एवं सीमित डाटा के जरिये ही समझे गए हैं। नासा के मुताबिक, मौजूदा कक्षीय स्थिति के चलते इस फ्लाई-बाय के दौरान चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से का सिर्फ 20 फीसदी हिस्सा ही सूर्य के प्रकाश में होगा।
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हैनसेन चंद्रमा पर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी
चारों अंतरिक्ष यात्रियों में ग्लोवर, रीड वाइजमैन और क्रिस्टीना कोच अमेरिकी नागरिक हैं, जबकि हैनसेन कनाडाई मूल के हैं, जो चंद्रमा पर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी हैं। कोच और ग्लोवर चंद्रमा पर जाने वाली पहली महिला एवं पहली अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं। 10 दिन का मिशन 10 को प्रशांत महासागर में लैंडिंग के साथ समाप्त होगा।
शौचालय में फिर आई दिक्कत
उधर, नासा के ओरियन कैप्सूल का शौचालय फिर से खराब हो गया है। यह बुधवार को उड़ान भरने के बाद से ही खराब हो गया था। तब से कभी काम कर रहा है और कभी नहीं। शौचालय जब तक ठीक नहीं हो जाता, मिशन कंट्रोल ने अंतरिक्ष यात्रियों को अतिरिक्त मूत्र संग्रहण थैलियों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।
- नासा के ओरियन कार्यक्रम की उप प्रबंधक डेबी कोर्थ ने बताया, अंतरिक्ष यात्रियों ने शौचालय से आ रही दुर्गंध की भी शिकायत की है, जो गोपनीयता के लिए दरवाजे और पर्दे के साथ कैप्सूल के फर्श में बना है।
ओरिएंटल बेसिन: सौरमंडल के टकराव इतिहास की कुंजी
वैज्ञानिकों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर ओरिएंटल बेसिन है, जो करीब 930 किलोमीटर चौड़ा बहु-वलय (मल्टी-रिंग) प्रभाव बेसिन है और चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है। माना जाता है कि यह एक विशाल क्षुद्रग्रह के टकराने से बना, जिसने सतह को वाष्पित कर बाहर की ओर फैलाया और फिर चंद्रमा की परत को धंसने पर मजबूर किया। इस कारण इसके तीन समकेंद्रित छल्ले बने।
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ओहम और पियराज्जो क्रेटर: पहली बार प्रत्यक्ष अवलोकन
कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्रेटर पर भी नजर रहेगी, जिन्हें मानव आंखों ने अब तक सीधे नहीं देखा है। इनमें 64 किलोमीटर चौड़ा ओहम क्रेटर शामिल है, जिसके केंद्र में एक ऊंचा शिखर है और इसके तल पर लावा प्रवाह मौजूद हैं। इसके अलावा, 9 किलोमीटर चौड़ा पियराज्जो क्रेटर भी वैज्ञानिकों के अध्ययन का केंद्र होगा।
कनाडा के लिए इतिहास रच रहे हैनसेन
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी की अध्यक्ष लिसा कैंपबेल ने कहा, हैनसेन आज कनाडा के लिए इतिहास रच रहे हैं। कनाडा का भविष्य उन लोगों से लिखा जाता है, जो और अधिक हासिल करने का साहस रखते हैं।
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