पाकिस्तान सरकार ने केन्याई अधिकारियों से पिछले महीने केन्या में पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या के संबंध में विवरण और जांच रिपोर्ट साझा करने को कहा है। जियो न्यूज ने सोमवार सुबह यह जानकारी दी। पाकिस्तान ने केन्याई अधिकारियों से टेलीफोन बातचीत और अम्मोडम्प प्रशिक्षण शिविर (AmmoDump Training Camp) के तीन मालिकों के इतिहास के बारे में जानकारी साझा करने को कहा है। अम्मोडम्प प्रशिक्षण शिविर उस इलाके में है, जहां यह घटना हुई थी। इस ट्रेनिंग कैंप का मालिकाना हक वकार अहमद, उसकी पत्नी मोरिन वकार और खुर्रम अहमद के पास है। यह ट्रेनिंग कैंप एक निर्जन क्षेत्र में पहाड़ी भूमि के एक बड़े हिस्से पर बना है।
जियो न्यूज ने केन्या की राष्ट्रीय पुलिस सेवा के हवाले से बताया कि उसे पाकिस्तान सरकार से एक पत्र मिला है जिसमें जनरल सर्विस यूनिट (जीएसयू) के सशस्त्र अधिकारियों द्वारा मारे गए अरशद शरीफ की हत्या की जांच में सहायता के लिए कई क्षेत्रों में मदद मांगी गई है। पाकिस्तान सरकार ने केन्याई पुलिस से शरीफ की हत्या पर अपना निष्कर्ष देने को भी कहा है। पाकिस्तान सरकार ने उनसे अनुदेशकों और प्रशिक्षकों के नाम और संपर्क जैसे विवरण प्रदान करने के लिए कहा है, जो घटना के समय अम्मोडम्प ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे।
पाकिस्तान के जांचकर्ताओं ने केन्या पुलिस से घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों के नाम, पद, कॉल और संपर्क विवरण, घटना से संबंधित बैलिस्टिक रिपोर्ट और आरोपी अधिकारियों के शुरुआती बयान को भी साझा करने के लिए कहा है। जियो न्यूज के मुताबिक, पाकिस्तानी जांच टीम जांच पूरी कर पाकिस्तान लौट गई है। नैरोबी में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने केन्याई पुलिस अधिकारियों, खुफिया अधिकारियों और कई सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने शरीफ की हत्या की जगह और शूटिंग रेंज अम्मोडम्प का भी दौरा किया।
पत्रकार शरीफ की हत्या की जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने वकार भाइयों और खुर्रम से नैरोबी के उस अपार्टमेंट, जहां अशरफ रुके थे और नैरोबी से बाहर प्रशिक्षण स्थल जहां शरीफ को उनकी दुखद हत्या से पहले आखिरी बार जिंदा देखा गया था, का सीसीटीवी फुटेज मुहैया कराने को कहा है।
वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ (49) की 24 अक्तूबर को केन्या में उस समय मौत हो गई थी जब वह अपने भाई खुर्रम अहमद के साथ रात करीब 10 बजे मगदी से नैरोबी जा रहे थे।अरशद शरीफ का मौत का मामला पहला मामला नहीं है जिसमें किसी पाकिस्तानी पत्रकार को संदिग्ध परिस्थितियों में धमकाया गया, प्रताड़ित किया गया या मार डाला गया। इससे पहले भी स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने सलीम शहजाद और हामिद मीर जैसे कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को उनके कथित "सैन्य विरोधी" रुख के लिए निशाना बनाया था। कहीं न कहीं इस घटना ने पाकिस्तानी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पेरिस की मीडिया वॉचडॉग रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की एक रिपोर्ट पर में कहा गया है कि वॉयस ऑफ वियना ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान में मीडिया ब्लैकआउट और असहमतिपूर्ण आवाजों के दमन का इतिहास रहा है। पाकिस्तान विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक सूची में 180 देशों में 157 वें स्थान पर है। अप्रैल के अंत में जब से शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री का पद संभाला है, कई पाकिस्तानी पत्रकारों ने सेना से संबंधित एजेंसियों द्वारा डराने-धमकाने की सूचना दी है।