कोरोना महामारी के चलते दुनियाभर में अब तक करीब 10 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि, इन मौतों ने कोरोना से इलाज की उम्मीद भी जगाई है।
दरअसल, इन मौतों से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली है कि कोरोना मरीजों का किस तरह से इलाज किया जाए और किस तरह से बाकी लाखों लोगों की जान कैसे बचाई जाए। इलाज के दौरान जो दवाएं दी गईं, उनमें से कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हुईं।
अमेरिका के नेब्रास्का में दशकों तक एक पारिवारिक चीनी रेस्तरां चलाने वाले मिंग वांग (71) अपनी पत्नी के साथ छुट्टियों में ऑस्ट्रेलिया घूमने गए थे, जहां एक क्रूज पर आराम फरमाने के दौरान उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया।
जून में इस दुनिया से जाने से पहले वह 74 दिनों तक अस्पताल में रहे। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन पर कई तरह के प्रयोग भी किए। इनमें से एक कोरोना के इलाज के लिए दी गई एंटी वायरल दवा पर अध्ययन भी था।
वांग की बेटी एनी पीटरसन के मुताबिक, डॉक्टर जो भी कहते, हम हामी भर देते। मकसद था कि किसी तरह पिता की जान बचे। इससे इलाज करा रहे कई और मरीजों को फायदा भी पहुंचा। कुछ और मौतों के बाद अमेरिका में जैसे-जैसे ये प्रयोग होते गए, वैसे ही मरने वाले मरीजों की संख्या की दर में गिरावट आती गई।
अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक डॉ. फ्रांसिस कॉलिंस के मुताबिक, मौतों की दर में गिरावट के पीछे हमारा लगातार बेहतर करने की कोशिश रही। हमने मरीजों पर कई तरह के दवाओं को आजमाया, जिससे डॉक्टर ये जान सके कि कौन सी दवा मरीजों पर ज्यादा असर करती है। साथ ही यह भी जान सके कि मरीजों का इलाज किस तरह से करना है।
सभी बीमारियों पर भारी कोरोना
कोरोना से बीते नौ महीने में अब तक करीब 10 लाख मौत हो चुकी है। वहीं, इसके मुकाबले 2019 में अन्य बीमारियों की बात करें तो एड्स से 6.9 लाख, मलेरिया से चार लाख मौतें हुई हैं। इस मामले में कोरोना सिर्फ टीबी से ही पिछड़ा है, जिससे 15 लाख मौतें हो चुकी हैं।
बेहतर इलाज क्या, मरीजों पर प्रयोग से पता चला
डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना मरीजों पर इलाज के दौरान पता चला कि कौन सी दवा काम करती है और कौन सी काम नहीं करती है। जैसे कि डेक्सामीथाजोन और इसी तरह की दूसरी एस्टरॉयड को अभी तक हम जानते थे कि यह अस्पताल में भर्ती उन मरीजों पर ज्यादा असर करती है, जिन्हें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ती है।
मगर, प्रयोगों से यह पाया गया कि यह दवा मरीज को और नुकसान पहुंचा सकती है या फिर मरीज को और कमजोर कर सकती है। इसी तरह एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर संक्रमित मरीजों के इलाज में ज्यादा कारगर है और तेजी से सुधार होता है और अस्पताल में आने के चार दिन में ही मरीज बेहतर महसूस करने लगता है।
इसके अलावा दो एंटी इनफ्लेमेटरी दवाएं रेमडेसिविर के साथ दिए जाने पर भी मरीजों को बेहद फायदा हुआ। हालांकि, इसके नतीजे प्रकाशित नहीं हुआ।
अब नई उम्मीद: बुजुर्गों के बजाय युवाओं में कोरोना, मौतें भी घटीं
अमेरिका के महामारी रोकथाम नियंत्रण और सुरक्षा केंद्र के वैज्ञानिक रह चुके डॉ. साइरस शाहपर के मुताबिक, भले ही कोरोना के मामले बढ़ रहे हों, मगर मौतों की दर में दिन प्रति दिन गिरावट आ रही है। अभी तक वायरस असल में कितना घातक है, इसे लेकर जानकारी पूरी तरह नहीं मिल पाई है।
दरअसल, वैज्ञानिकों को यह भी नहीं पता है कि कितने मरीज ऐसे हैं, जिनमें कोरोना के बिल्कुल ही लक्षण नहीं हैं। यह समस्या देशों के हिसाब से भी बदल रही है। कहीं पर टेस्ट कम है तो कहीं पर आबादी ज्यादा खतरे में है। अमेरिका में अप्रैल में मृत्युदर पांच फीसदी के आसपास थी, जो अब घटकर तीन फीसदी ही रह गई।
वहीं अगस्त में यह डेढ़ फीसदी ही रह गई। एक और बदलाव यह देखने को मिल रहा है कि अब बुजुर्गों के बजाय युवाओं को कोरोना ज्यादा संक्रमित कर रहा है, जो कोरोना के चलते जान नहीं गंवा रहे हैं।