पाकिस्तान में नौ मई को सैन्य प्रतिष्ठानों पर इमरान समर्थकों के हमले रोकने में नाकामी पर एक लेफ्टिनेंट जनरल व एक मेजर जनरल सहित तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसी नाकामी का दोषी पाए जाने पर एक मेजर जनरल समेत सात सैन्य अधिकारियों का कोर्ट मार्शल शुरू किया गया है। सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि नौ मई की हिंसा में शामिल सभी लोगों को संविधान और कानून के तहत दंडित किया जाएगा।
सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल अरशद शरीफ ने कहा कि सेना ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ समर्थकों के विरोध प्रदर्शन की दो बार जांच की और कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि एक लेफ्टिनेंट-जनरल समेत तीन अधिकारियों को हटा दिया गया है और तीन मेजर जनरलों और सात ब्रिगेडियर समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि जांच मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों द्वारा की गई।
पाकिस्तानी सेना की प्रचार शाखा आईएसपीआर के निदेशक मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने सोमवार को पत्रकारों को बताया, ये अधिकारी हिंसा की साजिश रचने वालों में भी शामिल हो सकते हैं। नौ मई को इमरान की गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा में 11 लोग मारे गए थे और 283 घायल हुए थे। चौधरी ने नौ मई को देश और सेना के इतिहास का सबसे काला दिन बताया। इमरान के खिलाफ भी सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा। सैन्य प्रवक्ता ने बताया, कोर्ट मार्शल का सामना करने वालों में एक मेजर जनरल और छह ब्रिगेडियर शामिल हैं। चौधरी ने कहा, इस बात के सबूत मिले हैं कि हिंसा की साजिश महीनों पहले रची गई थी।
इमरान समर्थकों पर 20 से ज्यादा संस्थाओं पर हमले का आरोप
इमरान खान और उनके समर्थकों पर सेना के व सरकार 20 से ज्यादा अहम ठिकानों पर हमले का आरोप है। इनमें पाकिस्तानी सेना मुख्यालय (जीएचक्यू), आईएआई का मुख्यालय, वॉर मेमोरियल, पाकिस्तान रेडियो का दफ्तर, गवर्नर हाउस, सैन्य अधिकारियों के घर शामिल हैं। सेना ने इस मामले में करीब 7 हजार खान लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से करीब 102 के खिलाफ सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाए जाने की मंजूरी दी गई है, जबकि 17 के खिलाफ सुनवाई शुरू हो चुकी है।