समाज में जेंडर समानता की बात बढ़ रही है, उसका दायरा विस्तृत हो रहा है। तब यह बात खटकती है कि गर्भनिरोध से संबंधित दुष्प्रभावों के अलावा भावनात्मक, सामाजिक, वित्तीय और समय से संबंधित चुनौतियों का सामना केवल महिलाओं को ही करना पड़ रहा है। ऐसे में, हम लोगों के पास अभी तक पुरुषों वाली गर्भनिरोधक गोलियां क्यों नहीं है?
महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियों की जब खोज हुई, उसके एक दशक के भीतर ही ये आम लोगों के लिए उपलब्ध हो गईं थीं। पुरुषों की गोलियों के बाजार में पहुंचने में इतना लंबा वक्त क्यों लग रहा है, जबकी इसका पहला ट्रायल 1970 में हो गया था।
कुछ वैज्ञानिकों का दावा है कि पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का विकास करने की प्रक्रिया महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियों की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल है। पुरुषों की गर्भनिरोधक गोलियां स्पर्म उत्पादन को रोक कर अपना काम करती है, लेकिन ऐसा करने के लिए जिस तरह के हॉर्मोन की जरूरत होती है उसके साइड इफेक्ट्स होते हैं।
इसके अलावा सामाजिक और आर्थिक कारकों की भी अपनी भूमिका है। प्रजनन संबंधी विज्ञान और मेडिसीन की दुनिया मुख्य तौर पर महिलाओं के शरीर पर केंद्रित है, इसमें पुरुषों की अनदेखी होती है।
उदाहरण के लिए, हर कोई यह तो जानता है कि गायनोकोलॉजिस्ट क्या करते हैं लेकिन लोगों को एंड्रोलॉजिस्ट के बारे में मालूम नहीं होता। एंड्रोलॉजिस्ट उन विशेषज्ञों को कहा जाता है जो पुरुषों के प्रजनन संबंधी विज्ञान में दक्ष होते हैं।
क्यों रुका हुआ है काम?
महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियों के कई दशकों के बाद पुरुषों के लिए ऐसी गोलियों पर काम शुरू हुआ और इसके बाद यह काम फ़ंड की कमी के चलते अटकता रहा।
पुरुषों के लिए ऐसी ही एक गोली 'क्लीन शीट्स' पर रिसर्च रुकी हुई है, यह गर्भनिरोधक गोली सेक्स के दौरान पुरुष में वीर्य नहीं बनने देती। असल में वीर्य के निकलने को पुरुषों की सेक्शुअलिटी में अहम माना जाता है।
हालांकि कई दशक पहले हुए शोध के मुताबिक लंबे समय तक संबंधों में रहने वाली महिलाएं अपने पुरुष साथी पर भरोसा करती हैं और जहां बात कैजुएल सेक्स की आती है तो महिलाएं पुरुषों पर कम भरोसा करती हैं फिर चाहे पुरुष गर्भनिरोध का ही इस्तेमाल क्यों ना कर रहे हों।
'ये महिलाओं का काम है'
गर्भनिरोध को महिलाओं के काम के तौर पर देखा जाता है, ये धारणा भी है कि पुरुष गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल नहीं करते। वैसे अब जेंडर की भूमिका बदल रही है और पुरुष घर की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं और बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
यह संतुलन गर्भनिरोधक तक बढ़ सकता है क्योंकि शोध अध्ययन बता रहे हैं कि युवा पुरुष इसे साझा जिम्मेदारी के तौर पर देख रहे हैं। पुरुषों के कुछ समूह, जो कहीं ज्यादा शिक्षित हैं, प्रभावी हैं और परंपरागत तौर पर जेंडर भूमिकाओं में विश्वास नहीं रखते हैं वे पुरुषों की गर्भनिरोधक गोली को लेकर उत्सुक हैं।
भले ही पुरुष इन गर्भनिरोधक गोलियों का स्वागत कर रहे हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी पुरुष इन्हें इस्तेमाल करने लगेंगे। हम नसबंदी के मामले में यह देख सकते हैं। पुरुषों की नसबंदी की प्रक्रिया 200 साल पहले शुरू हो गई थी लेकिन फिर भी महिलाओं की नसबंदी पुरुषों की तुलना में 10 गुना ज्यादा होती है।
पुरुषों की गर्भनिरोधक गोलियों को विकसित करने के लिए सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटना होगा। इसमें सबसे जरूरी और पहला कदम है लैंगिक समानता का दायरा बढ़ाना। हम पुरुषों की गर्भनिरोधक गोली का इंतजार 50 साल से कर रहे हैं, अब और 50 साल का इंतजार नहीं कर सकते।