मलयेशिया में लंबे समय तक विपक्ष के सुधारवादी नेता रहे अनवर इब्राहिम ने बृहस्पतिवार को देश के पीएम के रूप में शपथ ले ली। इससे पहले मलयेशियाई सुल्तान अब्दुल्ला अहमद शाह ने उन्हें देश का प्रधानमंत्री घोषित किया। इसी के साथ मलयेशिया में खंडित जनादेश वाले आम चुनावों के बाद कई दिनों से जारी सियासी अनिश्चितता का अंत हो गया है। अनवर ने राष्ट्रीय महल में सादा समारोह में शपथ ली।
मलयेशिया के सुल्तान ने 75 वर्षीय अनवर को देश के 10वें नेता के रूप में यह कहते हुए नामित किया कि वह अनवर जैसे प्रत्याशी से संतुष्ट हैं जिनके पास बहुमत का समर्थन होने की संभावना है। अनवर के एलायंस ऑफ होप ने 82 सीटों के साथ शनिवार के चुनाव में जीत हासिल की लेकिन यह गठबंधन बहुमत के लिए जरूरी 112 सीटें नहीं जीत पाया। लेकिन अब अनिश्चितता दूर हो गई है।
नई सरकार से विनम्र रहने का आग्रह
75 वर्षीय मुहिद्दीन के हार मानने से इन्कार के बीच, मलयेशिया के सुल्तान ने अनवर और उनकी नई सरकार से विनम्र रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, पीएम सियासी उथल-पुथल खत्म करने के लिए सामंजस्य स्थापित करें।
कम रहेगी इस्लामीकरण की आशंका
माना जा रहा था कि किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए पैन-मलयेशियन इस्लामी पार्टी की मदद लेना पड़ेगी। लेकिन अब इसकी संभावना नहीं बची है। इससे अल्पसंख्यकों में व्यापक इस्लामीकरण पर भय कम हुआ है।
सुल्तान ने दिया था एकता सरकार का प्रस्ताव
मलेशिया के प्रधानमंत्री के बारे में घोषणा अधिकांश दलों द्वारा सुल्तान अब्दुल्ला अहमद शाह के एकता सरकार के गठन के प्रस्ताव पर सहमत होने के बाद की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अनवर इब्राहिम और उनके प्रतिद्वंद्वी पेरिकटन नेशनल (पीएन) के प्रमुख मुहीद्दीन यासिन संसद में बहुमत के लिए आवश्यक 112 सांसदों का समर्थन हासिल करने में असमर्थ थे।
इसके बाद गुरुवार को यूनाइटेड मलेशियाई नेशनल ऑर्गनाइजेशन (यूएमएनओ) पार्टी ने बारिसन नेशनल (बीएन) गठबंधन की विपक्ष में रहने की पिछली राय से अलग रुख अपनाते हुए एकता सरकार का हिस्सा बनने की इच्छा व्यक्त की। मलेशिया में अन्य राजनीतिक दलों ने भी यूएमएनओ द्वारा अपनाए गए रुख का समर्थन किया। पीएन ने यह भी घोषणा की कि वह समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ एकता सरकार के प्रस्ताव पर विचार करेगी