संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने शुक्रवार को अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान सभी के लिए बेहतर भविष्य के नाते हरसंभव प्रयास का संकल्प जताया। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दूसरे कार्यकाल के लिए महासचिव नियुक्त किए जाने के कुछ ही समय बाद गुटेरस ने यह बात कही।
गुटेरस का दूसरा कार्यकाल एक जनवरी 2022 से शुरू होगा और 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। इससे पहले शक्तिशाली सुरक्षा परिषद ने 193 सदस्यीय संस्था के लिए एंटोनियो गुटेरस के पुन: निर्वाचन की सर्वसम्मति से सिफारिश की थी।
संरा महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने यह घोषणा की। बोजकिर ने 72 वर्षीय गुटेरस को संरा महासभा के हॉल में मंच पर शपथ दिलवाई। इससे पहले, आठ जून को 15 सदस्यीय परिषद की बैठक में महासचिव के पद के लिए सर्वसम्मति से गुटेरस के नाम की सिफारिश वाले प्रस्ताव को अपनाया गया था।
यह अद्भुत क्षण, मैं भावुक हो रहा हूं : एंटोनियो गुटेरस
गुटेरस ने शपथ लेने के बाद महासभा में कहा कि यह एक अद्भुत क्षण है। मैं भावुक हो रहा हूं। आपने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के रूप में दूसरे कार्यकाल में सेवाएं देने के लिए मुझ पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए मैं आभारी हूं और सम्मानित महसूस कर रहा हूं। संयुक्त राष्ट्र की सेवा करना विशेषाधिकार वाला है और अत्यंत पावन जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि दुनिया वास्तव में दोराहे पर खड़ी है। मानदंड बदल रहे हैं। पुरातनपंथी सोचों को त्यागा जा रहा है। हम आज जो चीजें चुन रहे हैं, उनसे अपना खुद का इतिहास लिख रहे हैं। यह किसी भी ओर जा सकता है- या तो संकट की स्थिति पैदा हो या सफलता मिले और सभी के लिए हरे-भरे, सुरक्षित और बेहतर भविष्य की संभावनाएं हों। आशावादी होने की ये ही वजहें हैं।
गुटेरस ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने हमारी संवेदनशीलताओं को, हमारे आपस में जुड़े रहने को और सामूहिक कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि हम बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता के लिए हर जगह एक नयी मुहिम देखते हैं। मैं आपको वचन देता हूं कि सकारात्मक परिदृश्य में योगदान के लिए अपने दूसरे कार्यकाल में मेरे अधिकार क्षेत्र में जो संभव होगा, सब करूंगा।
एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि सभी जगह सभी के लिए टीकों की उपलब्धता जरूरी है और हमें विकसित और विकासशील दुनिया, दोनों में ही सतत तथा समावेशी बहाली के लिए स्थितियां पैदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सब तभी संभव होगा जब हम उस विश्वास की कमी से पार पा लें, जिसने समाज पर असर डाला है।