कोरोना की दवा खोज रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि एंटिबॉडी के मिश्रण से कोरोना वायरस को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है। अध्ययन के मुताबिक 2002-03 में एसएआरएस महामारी से स्वस्थ हुए पीड़ित व्यक्ति की एंटीबाडी का इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
जर्नल नेचर में छपे इस अध्ययन में कहा गया है कि एसएआरएस से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न एंटीबॉडी वायरस को निष्क्रिय कर सकती है। इससे एंटी वायरल उपचारों के साथ ही टीका विकसित करने में मदद मिलेगी। अध्ययन में शामिल अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के शोधकर्ता ने कहा कि खास तरह की एंटीबॉडी विशेष प्रोटीन पर निशाना साध सकती है।
उन्होंने कहा कि इन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की पहचान होने से जो कोरोना वायरस, एसएआरएस-सीओवी -2 और इसी तरह के अन्य वायरस पर पाए जाने वाले स्पाइक प्रोटीन से बांध सकते हैं, कोविड-19 के इलाज या रोकथाम के प्रयासों में मदद कर सकते हैं। अध्ययन में डेविड कोर्टी और उनके सहयोगियों ने एसएआरएस 2002-03 से ठीक हुए पीड़ित में मौजूद मोनोक्लोनल एंटीबाडी की पहचान की है।