ट्रंप प्रशासन ने सरकारी दक्षता विभाग के प्रस्ताव के बाद हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसे लेकर श्रमिक संगठनों ने कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।
ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से एक और झटका लगा है। एक अपील अदालत ने सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के संघीय कर्मचारियों की कटौती के प्रस्ताव पर रोक बरकरार रखी है। कोर्ट ने कैलिफोर्निया के न्यायाधीश की ओर से लगाई गई रोक के आदेश को स्थगित करने से इनकार कर दिया।
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ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव के विरोध में श्रमिक यूनियनों ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इसके बाद सैन फ्रांसिस्को के अमेरिकी न्यायाधीश सुसान इल्स्टन ने सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के कर्मचारियों की कटौती करने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। न्यायाधीश ने आदेश में सवाल उठाया कि क्या ट्रंप प्रशासन संघीय कार्यबल में कटौती करने के प्रयास में वैधानिक तरीके से कार्य कर रहा था?
न्यायाधीश सुसान इल्स्टन ने अपने आदेश में कई संघीय एजेंसियों को फरवरी में हस्ताक्षरित राष्ट्रपति के कार्यबल कार्यकारी आदेश और उसके बाद सरकारी दक्षता विभाग और कार्मिक प्रबंधन कार्यालय द्वारा जारी ज्ञापन पर कार्रवाई रोकने का निर्देश दिया। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि राष्ट्रपति संघीय एजेंसियों में बड़े पैमाने पर बदलाव कर सकते हैं, लेकिन केवल कांग्रेस के सहयोग से।
मामले में ट्रंप प्रशासन ने आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। सरकार के वकीलों ने कहा कि बड़े पैमाने पर कार्मिकों की कटौती और पुनर्गठन योजनाओं का आह्वान करने वाले कार्यकारी आदेश और ज्ञापन में केवल सामान्य सिद्धांत दिए गए हैं, जिनका एजेंसियों को अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया में पालन करना चाहिए।
हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतने के बाद लगातार कह रहे हैं कि मतदाताओं ने उन्हें संघीय सरकार के पुनर्निर्माण के लिए जनादेश दिया है। उन्होंने सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के माध्यम से इस कार्य का नेतृत्व करने के लिए अरबपति एलन मस्क को चुना। सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के प्रस्ताव के बाद हजारों संघीय कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। कई कर्मचारियों ने स्थगित त्यागपत्र कार्यक्रम के जरिये अपनी नौकरी छोड़ दी है या उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है। हालांकि नौकरी में कटौती का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन कम से कम 75,000 संघीय कर्मचारियों से स्थगित त्यागपत्र लिया गया है। जबकि प्रोबेशन पर काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को पहले ही नौकरी से निकाल दिया गया है।