तुर्की के प्राचीन हसनकीफ शहर में इलिसु बांध बनाए जाने के कारण 12 हजार साल पुराना शहर हफ्तेभर में ही जलमग्न हो जाएगा। बताया गया है कि यह शहर मेसोपोटामिया की सबसे पुरानी बस्तियों में एक है। इस बांध के निर्माण के बाद इलिसु बांध तुर्की का चौथा सबसे बड़ा बांध होगा। यह परियोजना सालों से विवादों में घिरी है।
क्षेत्र के गवर्नर ने एक बैठक में बताया कि निवासियों को अपने घरों को खाली करने के लिए एक महीने का समय दिया गया। बांध का निर्माण क्षेत्र के लिए बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जा रहा है।
बांध के चलते पिछले साल एक 600 साल पुरानी मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, बांध बनाए जाने के कारण 80 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो जाएंगे।
यह शहर दक्षिण-पूर्व तुर्की के टिगरिस (दजला) नदी के किनारे बसा है। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण विशेषताओं में 12 वीं शताब्दी का एक पुल, 15 वीं शताब्दी के बेलनाकार मकबरे, दो मस्जिदों के खंडहर और सैकड़ों प्राकृतिक गुफाओं के अवशेष हैं।
तुर्की के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर की सड़कों, घरों और ऐतिहासिक स्थलों को दोबारा उकेरा जाएगा। उन्होंने कहा कि बांध के बनने से स्थानीय लोगों को कई तरह के आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे होंगे।
हसनकीफ शहर तुर्की के बैटमैन क्षेत्र में स्थित है। शहर के गवर्नर हुलसी साहिन ने कहा था कि जब क्षेत्र में नई सड़क खुल जाएगी तो प्राचीन शहर बंद हो जाएगा। इसके बाद पुरानी बस्ती में किसी भी प्रकार का कोई यातायात नहीं होगा और इसे पूरी तरह से सुरक्षा घेरे में ले लिया जाएगा।
शहर को बचाने के लिए अभियान चलाने वाले समूहों ने इसका कड़ा विरोध किया है। ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों ने इलिसु बांध बनाए जाने से अपना समर्थन 2001 में वापस ले लिया था। 2008 में बांध के लिए यूरोपीय देशों से मिलने वाला फंड भी बंद हो गया था।