मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शनों पर व्यापक सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय चुनावों से पहले अधिकारियों ने अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया, असहमति की आवाज को दबाया और बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन किया।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किए जाने के फैसले की भी आलोचना की। एमनेस्टी ने इस कदम को गैरकानूनी और असंगत बताते हुए कहा कि यह संगठन बनाने की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों पर गंभीर हमला है।
27 जुलाई से ही पीओके में पाकिस्तानी सेना ने लगाए कई प्रतिबंध
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र की विधानसभा की संरचना को लेकर जेकेजेएएसी और अधिकारियों के बीच बातचीत विफल होने के बाद कार्रवाई तेज हो गई। पांच जून को, जिस दिन पाकिस्तान ने 27 जुलाई को क्षेत्रीय चुनाव कराने की घोषणा की, उसी दिन पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं निलंबित कर दी गईं। इसके साथ ही आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
पर्यटकों और आगंतुकों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी गई, जबकि संघीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की भी खबरें सामने आईं। एमनेस्टी के अनुसार, इन कदमों ने क्षेत्र को प्रभावी रूप से अलग-थलग कर दिया है और सूचनाओं के प्रवाह पर गंभीर असर डाला है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं पर बरपाया कहर
पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया है। स्थानीय पत्रकार सोहराब बरकत को कथित तौर पर अपनी ऑनलाइन रिपोर्टिंग के माध्यम से जेकेजेएएसी का प्रचार करने के आरोप में पाकिस्तान के साइबर अपराध कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया और वह अब भी हिरासत में हैं। एमनेस्टी के अनुसार, पांच जून से अब तक सुरक्षा बल जेकेजेएएसी के 100 से अधिक सदस्यों और समर्थकों को हिरासत में ले चुके हैं।
मुजफ्फराबाद स्थित संगठन के केंद्रीय कार्यालय पर भी छापा मारा गया और उसे सील कर दिया गया। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब जेकेजेएएसी कार्यकर्ता शाहजेब हबीब पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई। एमनेस्टी ने कहा कि ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह संकेत मिले कि हबीब पुलिस अधिकारियों के लिए तत्काल खतरा थे।
प्रदर्शनकारियों की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग
उनकी मौत के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जो रावलाकोट स्थित एक सैन्य अस्पताल के बाहर हिंसक झड़पों में बदल गए। पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों और चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य लोग घायल हुए। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हबीब की मौत, प्रदर्शनकारियों की मौतों और हिंसा से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।