नेतन्याहू ने वैश्विक मंच पर भारत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा देश है, जो एशिया में अलग पहचान रखता है। उन्होंने अमेरिका और भारत के संबंधों को 'दो बेहतरीन दोस्त, जिनके बीच बहुत सारे साझा आधार हैं' बताया। उन्होंने कहा कि इसका समाधान हो सकता है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को भारत के साथ अमेरिका के चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच भारत का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन डीसी में यह बुनियादी समझ है कि भारत एक मजबूत साझेदार है। नेतन्याहू ने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते दबदबे पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जो एशिया में अलग पहचान रखता है। उन्होंने अमेरिका और भारत के संबंधों को 'दो बेहतरीन दोस्त, जिनके बीच कई समानताएं हैं' बताया। टैरिफ को लेकर जारी तनाव पर उन्होंने कहा कि इस समस्या का भी समाधान संभव है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उन्होंने हमास को खत्म करने के लिए गाजा पर सैन्य हमले बढ़ाने की अपनी योजना का खुलासा किया।
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ट्रंप ने छेड़ी टैरिफ वॉर
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखने पर नई दिल्ली के लिए दंड के तौर पर भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की, जो 27 जुलाई से लागू हो सकता है। इससे पहले अमेरिका ने 20 जुलाई को भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जो 7 अगस्त से लागू हो गया है।
भारत ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव दम्मू रवि ने कहा, 'यह एकतरफा फैसला है। मुझे नहीं लगता कि इसे जिस तरह से लिया गया है, उसमें कोई तर्क या वजह है।' टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से समझौता नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरे भाइयों-बहनों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं कि मुझे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़ा है और उनके कल्याण के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं।'
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ऑपरेशन सिंदूर में इस्राइली हथियारों के इस्तेमाल पर पहली बार बोले नेतन्याहू
इस्राइली प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ओर से इस्राइली हथियारों (रक्षा अनुसंधान विकास संगठन के साथ संयुक्त रूप से विकसित बराक-8 मिसाइल और हार्पी ड्रोन) के इस्तेमाल की भी बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, 'हमने पहले जो उपकरण उपलब्ध कराए थे, वे जमीन पर बहुत कारगर रहे। हम अपने हथियार जमीनी स्तर पर ही विकसित करते हैं। उन्हें युद्ध के लिहाज से जांचा-परखा जाता है।' पिछले एक दशक में इस्राइल भारत के लिए सैन्य उपकरणों का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। इसके अलावा अन्य तीन देश रूस ($21.8 बिलियन), फ्रांस ($5.2 बिलियन) और अमेरिका ($4.5 बिलियन) हैं।