अमेरिकी कांग्रेस (संसद) द्वारा जो बाइडन की जीत की पुष्टि के बाद अब निर्वाचित राष्ट्रपति के पद भार ग्रहण करने को लेकर कोई शक नहीं बचा है। खासकर यह देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कह दिया है कि सत्ता का व्यवस्थित ढंग से हस्तांतरण होगा। मगर बुधवार को जो नजारा अमेरिका ने देखा, उसके बाद ट्रंप विरोधी हलकों में भय और गुस्से का माहौल है। स्थानीय मीडिया में ये आशंकाएं लगातार जताई जा रही हैं कि अपने कार्यकाल के बचे 12 दिन में ट्रंप फिर कोई ऐसी चाल चल सकते हैं, जिससे अमेरिकी लोकतंत्र को और क्षति पहुंचे।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि ट्रंप ने सत्ता के व्यवस्थित हस्तांतरण की बात कहते समय भी चुनावों का नतीजा धांधली से तय होने के अपने दावे को दोहराया। इस तरह वे लगातार अपने समर्थकों में उनके साथ धोखाधड़ी होने की भावना भड़का रहे हैं। आशंका यह है कि वाशिंगटन में कैपिटल हिल (संसद भवन) पर जो नजारा दिखा, उसका दोहराव कई दूसरे शहरों में आने वाले दिनों में हो सकता है। खासकर जिस रोज (20 जनवरी) जो बाइडन शपथ लेंगे, उस दिन ट्रंप समर्थक जगह-जगह हिंसक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपतियों का इतिहास लिखने वाले डगलस ब्रिंकले ने कहा है कि आक्रोश से भरा एक राष्ट्रपति अगले कुछ दिनों में देश को गहरी क्षति पहुंचा सकता है। ब्रिंकले ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- फेडरल ब्यूरो (एफबीआई) में किसी को डोनाल्ड ट्रंप की गतिविधियों की कड़ी निगरानी करनी चाहिए, क्योंकि वे विवेकहीन ढंग से व्यवहार कर रहे हैं।
विश्लेषकों ने कहा है कि बुधवार को जो हुआ, उसमें सबसे भयानक बात कैपिटल हिल पर हुआ हमला नहीं था। बल्कि यह जाहिर होना था कि ट्रंप ने अपने समर्थकों को कितना विवेकहीन बना दिया है। इन लोगों ने जो व्यवहार किया, उससे देश में राजनीतिक अलगाव की भावना और गहरी हो गई है। ट्रंप के पद से हटने के बाद भी लंबे समय तक ये भावना कायम रहेगी।
अमेरिकी टीवी चैनलों पर हुई चर्चा में कहा गया है कि अपने चार साल के कार्यकाल में ट्रंप ने बार-बार यह दिखाया कि वे बदले की भावना में बिल्कुल बह जाते हैं। अपने इस व्यवहार के साथ उन्होंने समाज में ऐसा ध्रुवीकरण किया, जो उनके कार्यकाल में हुई आर्थिक तबाही से भी ज्यादा हानिकारक साबित हुआ है। अब देश में इस बात पर भी बहस चल रही है कि चुनाव नतीजे को स्वीकार ना करने, अपने नाराज समर्थकों को और भड़काने और संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालने की ट्रंप की कोशिश को क्या कहा जाना चाहिए। कुछ विश्लेषकों और विपक्षी नेताओं ने इसे अवैध ढंग से तख्ता पलट की कोशिश कहा है। वाशिंगटन पुलिस के पूर्व प्रमुख चार्ल्स रामजे ने एक टीवी चैनल पर कहा- यह तख्ता पलट जैसी ही घटना थी, जैसाकि इस देश में पहले कभी नहीं हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपतियों के एक और इतिहासकार और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर टिमथी नेफतली ने राय जताई है कि ट्रंप ने उस सुनहरे धागे को तोड़ दिया है, जिसने अमेरिकियों की आजादी को कायम रखा था। नेफतली ने कहा- यह पहला मौका है, जब किसी राष्ट्रपति ने शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तांतरण करने से इनकार किया हो।
जानकारों को अधिक चिंता इस बात की है कि ट्रंप और उनके समर्थक मीडिया ने देश की बहुत बड़ी आबादी के बीच लोकतंत्र के प्रति अविश्वास का भाव पैदा कर दिया है। इस बात में करोड़ों अमेरिकी यकीन कर रहे हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस बार राष्ट्रपति चुनाव को चुरा लिया। इस कारण अंदेशा है कि जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद भी ट्रंप समर्थक उग्रवाद का असर अमेरिका में दिखता रहेगा।
बुधवार की घटना के बाद रिपब्लिकन पार्टी के बहुत से सांसदों और नेताओं ने खुद को ट्रंप से अलग करने का एलान किया। कुछ लोगों ने अपने पदों से इस्तीफे भी दिए। लेकिन जानकारों का कहना है कि पहले इन सभी लोगों ने ट्रंप को मजबूत करने में भूमिका निभाई। इसलिए अब उनके इस्तीफों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उलटे ट्रंप समर्थक जन समुदाय में ऐसे रिपब्लिकन नेताओं को अवसरवादी समझा जाएगा।
ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर एलान कर चुके हैं जिन रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति बने रहने की ट्रंप की मुहिम में साथ नहीं दिया, उनके खिलाफ वे देशभर में जन अभियान चलाएंगे। ये चर्चा पहले से रही है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप या उनके बेटे उम्मीदवार बनेंगे। विश्लेषकों को अंदेशा है कि इस कारण ‘ट्रंपवाद’ देश में एक जीवित राजनीतिक परिघटना अभी लंबे समय तक बना रहेगा।