अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देश में भी लोग अपनी राय साझा करने से कतरा रहे हैं। एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। लोगों का कहना है कि उनकी सोच का पता लगने पर उनके सामने नौकरी गंवाने का संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल, देश में राजनीतिक माहौल पर कैटो इंस्टीट्यूट और यू-गव द्वारा एक सर्वेक्षण किया गया था, जिसकी रिपोर्ट जारी की गई है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में लोग अपने विचारों को साझा करने में डर रहे हैं, उन्हें इस बात का डर है कि उनसे सहमत नहीं होने वाले लोग उनपर हमला कर सकते हैं। इसमें बताया गया है कि 62 फीसदी लोगों का मानना है कि वे अपने राजनीतिक राय को साझा करने से डरते हैं, क्योंकि उनसे असहमत लोग उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कम आय वाले लोगों में ज्यादा डर
इसमें बताया गया है कि सबसे ज्यादा डर कम आय वाले लोगों के भीतर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन परिवारों की सालाना आय 15 लाख रुपये हैं, उनमें से 36 फीसदी परिवारों का मानना है कि विचारधारा जैसे मुद्दे रोजगार को प्रभावित करते हैं। वहीं, उच्च आय वाले परिवार, जिनकी सालाना आय 75 लाख रुपये से ज्यादा है, उनमें से 33 फीसदी भी ऐसी ही राय रखते हैं।
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32 फीसदी लोगों को डर विचारधारा पता चलने पर जा सकती है नौकरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि 32 फीसदी नौकरीपेशा लोगों ने इस बात को कबूल किया है कि अगर उनके विचार के बारे में उनकी कंपनी या मालिक को पता चलता है तो उन्हें नौकरी गंवानी पड़ सकती है। इसमें पार्टियों का समर्थन करने वाले लोगों को लेकर भी सर्वेक्षण किया गया, जिसमें सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी को समर्थन देने वाले 38 फीसदी लोगों को लगता है कि उनकी विचारधारा को लेकर उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है। वहीं, डेमोक्रेट्स पार्टी के 28 फीसदी समर्थकों का भी यही मानना है।
ट्रंप के समर्थकों में सबसे ज्यादा डर
वर्तमान में अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसी पार्टी से हैं। इसके बाद भी सबसे ज्यादा डर इस पार्टी के समर्थकों में है। रिपोर्ट में सामने आया कि 10 में से 8 रिपब्लिकन समर्थक को लगता है कि अगर उसकी विचारधारा के बारे में पता चल गया, तो उस पर हमला हो सकता है।
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अश्वेत के मुकाबले श्वेत नागरिकों में ज्यादा डर
रिपोर्ट में यह बात निकलकर सामने आई है कि पिछले तीन साल में हर विचारधारा वाले लोगों के बीच डर का माहौल है। फिर वो चाहे कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोग हों या उदारवादी विचारधारा वाले। इसमें कहा गया है कि 35 फीसदी पुरुष और 27 फीसदी महिलाओं को भी लगता है कि विचारधारा जाहिर करने पर खतरा पैदा हो सकता है। सबसे चौकाने वाली बात है कि अश्वेत की तुलना में श्वेत अमेरिकियों के बीच सबसे ज्यादा डर का माहौल है।