डॉ. जोन बिरमन और वसुधा भरतराम
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कोलंबिया यूनिवर्सिटी से रिटायर 92 वर्षीय विख्यात गणितज्ञ डॉ. जोन बिरमन के इनबॉक्स में सात साल पहले एक ईमेल आया। संदेश 15 साल की हाई स्कूल छात्रा का था-मैंने हाल ही में अपना पहला गणितीय प्रूफ पढ़ा है। मुझे लगता है कि किताबों में जो सिखाया जाता है, गणित उससे कहीं आगे की चीज है। क्या आप मुझे वह सिखा सकती हैं जो मैं मिस कर रही हूं?
ऐसे में अकेलेपन से जूझ रहीं टोपोलॉजी विशेषज डॉ. बिरमन ने किशोरी को बुला लिया। उसे एडवांस मैथमेटिक्स की सबसे कठिन मानी जाने वाली किताब थमा दी। वह किशोरी थी वसुधा भरतराम, जो कुछ साल पहले ही परिवार के साथ भारत से न्यूयॉर्क शिफ्ट हुई थी।
उस मुलाकात ने गणित के इतिहास की सबसे अनोखी साझेदारी की नींव रख दी। आज सात साल बाद, 99 वर्ष की हो चुकीं डॉ. जोन बिरमन और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पीएचडी शुरू कर चुकीं 22 वर्षीय वसुधा ने दुनिया के शीर्ष गणितज्ञों को चकित करते हुए ब्रेड थ्योरी की उस सदी पुरानी जटिल पहेली को सुलझा दिया है, जिसके आगे दुनियाभर के वैज्ञानिक हार मान चुके थे।
क्या थी वह पहेली, जिसके सामने हार मान चुके थे दिग्गज
- बालों की चोटी की तरह आपस में लिपटे धागों के गणित को ‘ब्रेड (Braid) थ्योरी’ कहा जाता है। इसे बीजगणित के समीकरणों में बदला जाता है।
- करीब 90 साल पहले यह सवाल खड़ा हुआ था कि जब 4 धागों वाली चोटी को समीकरणों में बदला जाता है, तो क्या उसकी मूल संरचना की पहचान सुरक्षित रहती है या डाटा नष्ट हो जाता है?
दशकों से फंसा पेच : 3 धागों के लिए यह सिद्धांत सही साबित हुआ था और 5 या उससे अधिक धागों के लिए गलत साबित हो चुका था। लेकिन सिर्फ 4 धागों वाले केस पर पिछले 90 वर्षों से दुनिया का कोई भी गणितज्ञ यह साबित नहीं कर पाया था कि यह सही है या गलत। इसे सुलझाना बिना पैराशूट के विमान से छलांग लगाने जैसा जोखिम भरा माना जाता था।
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हार्डी और रामानुजन जैसी ऐतिहासिक जोड़ी की याद
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के गणित विभाग के प्रमुख डेविड गबाई ने कहा, इस जोड़ी की उपलब्धि से मुझे 1913 की वह घटना याद आ गई जब कैंब्रिज के प्रोफेसर जीएच हार्डी ने भारत के युवा श्रीनिवास रामानुजन की चिट्ठी पढ़कर उन्हें दुनिया के सामने लाकर अमर कर दिया था।
एआई से पहले मारी बाजी : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के गणितज्ञ इमैनुएल ब्रुइलार्ड उन्नत एआई और सुपरकंप्यूटर्स की मदद से वह पहेली को सुलझाने में जुटे थे। लेकिन 99 साल की बुजुर्ग और युवा भारतीय छात्रा ने इंसानी कल्पनाशीलता के दम पर इसे हल कर दिखाया।