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US: क्या बाइडन से पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाम वापस लिया था, डेमोक्रेट किसे और कैसे चुनेंगे अपना चेहरा?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 22 Jul 2024 02:56 PM IST

सार

US Election 2024: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने रविवार को राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दोबारा दावेदारी वापस कर ली। बाइडन ने पार्टी के उम्मीदवार के रूप में अपने स्थान पर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का समर्थन किया है। इससे पहले अमेरिका में पिछले 75 वर्षों में केवल दो ही राष्ट्रपति हुए थे जिन्होंने चुनावी साल में दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया था।
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चुनावी साल में दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : Amar Ujala GFX/White House Archive
अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी हलचलें बढ़ गई हैं। रविवार को यहां एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब जो बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया। अभी तक मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुकाबला था। हालांकि, अपनी पार्टी डेमोक्रेट में घटते समर्थन के बीच बाइडन ने अपने कदम वापस ले लिए। कई दिनों से इस बात के कयास भी लगाए जा रहे थे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने व्यक्तिगत तौर पर इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि बाइडन के लिए डोनाल्ड ट्रंप को हराना मुश्किल हो गया है। इस बीच राष्ट्रपति बाइडन ने कमला हैरिस को नए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन कर दिया है।

आइये जानते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में अभी क्या हुआ है? क्या बाइडन के पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीदवारी वापस ली थी? बाइडन के हटने के बाद अब डेमोक्रेट्स में आगे क्या होगा? तो बाइडन की जगह कौन ले सकता है?
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चुनावी साल में दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : Amar Ujala GFX/White House Archive
अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी हलचलें बढ़ गई हैं। रविवार को यहां एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब जो बाइडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया। अभी तक मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुकाबला था। हालांकि, अपनी पार्टी डेमोक्रेट में घटते समर्थन के बीच बाइडन ने अपने कदम वापस ले लिए। कई दिनों से इस बात के कयास भी लगाए जा रहे थे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने व्यक्तिगत तौर पर इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि बाइडन के लिए डोनाल्ड ट्रंप को हराना मुश्किल हो गया है। इस बीच राष्ट्रपति बाइडन ने कमला हैरिस को नए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में समर्थन कर दिया है।

आइये जानते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में अभी क्या हुआ है? क्या बाइडन के पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीदवारी वापस ली थी? बाइडन के हटने के बाद अब डेमोक्रेट्स में आगे क्या होगा? तो बाइडन की जगह कौन ले सकता है?

जो बाइडन - फोटो : AMAR UJALA
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में अभी क्या हुआ है?
जो बाइडन ने रविवार को राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दोबारा दावेदारी वापस कर ली। यह फैसला उस समय आया है जब बाइडन के साथी डेमोक्रेट उनके स्वास्थ्य और डोनाल्ड ट्रम्प को हराने की क्षमता पर चिंता व्यक्त कर रहे थे। जो बाइडन ने पार्टी के उम्मीदवार के रूप में अपने स्थान पर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का समर्थन किया है। हालांकि, पार्टी के दूसरे दिग्गज नेता और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। 

क्या पहले भी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीदवारी वापस ली थी?
अमेरिका में पिछले 75 वर्षों में केवल दो ही राष्ट्रपति हुए थे जिन्होंने चुनावी साल में दोबारा चुनाव न लड़ने का फैसला किया था। ये राष्ट्रपति थे हैरी एस. ट्रूमैन और लिंडन बी. जॉनसन और दिलचस्प है कि ये दोनों डेमोक्रेट थे। ट्रूमैन और जॉनसन ने यह एलान करके पूरे अमेरिका को हैरान कर दिया था कि वे अपनी पार्टी में नए उम्मीदवारों को मौका देंगे।

दोनों ही मामलों में उम्मीदवारी संभालने वाले नए डेमोक्रेट नेताओं एडले स्टीवेंसन और ह्यूबर्ट हम्फ्री को रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। स्टीवेंसन उस समय इलिनोइस राज्य के गवर्नर थे जबकि हम्फ्री उपराष्ट्रपति की कुर्सी पर थे। 

तो दोनों अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने उम्मीदवारी क्यों वापस ली थी?
मार्च 1952 में ट्रूमैन और मार्च 1968 में जॉनसन ने खुद को लड़ाई से बाहर कर लिया था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना हैं कि 1950 के दशक के शुरुआत और 1960 के दशक के अंत में राजनीतिक पृष्ठभूमि बहुत अलग थी।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स के प्रेसिडेंशियल हिस्टोरियन और फैकल्टी स्कॉलर टिम नैफ्टाली ने न्ययॉर्क टाइम्स को बताया, 'ट्रूमैन ने जब दूसरा कार्यकाल न लेने का फैसला किया था तब वह 67 साल के थे। वहीं दूसरी ओर जॉनसन 59 साल के थे। इन दोनों ने प्राइमरी के बीच में ही दौड़ से नाम वापस ले लिया, क्योंकि वे उस वक्त चल रहे घातक युद्धों को खत्म करने का कोई रास्ता खोजने के लिए संघर्ष कर रहे थे। ट्रूमैन के कार्यकाल में कोरिया युद्ध चल रहा था तो जॉनसन के लिए यह वियतनाम की लड़ाई थी।' 

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया चार चरण में संपन्न होती है। इसमें पहला चरण प्राइमरी और कॉकस चुनाव का होता है। प्राइमरी (इसका संचालन नियमित पोलिंग स्टेशन पर होता है) और कॉकस (एक तरह की स्थानीय बैठक) दो तरीके हैं जिनसे लोग राज्यों और राजनीतिक दलों को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुनने में मदद करते हैं। 

जो बाइडन का बड़ा बयान - फोटो : ANI
बाइडन के हटने के बाद डेमोक्रेट्स में आगे क्या होगा?
जो बाइडन ने भले ही दोबारा राष्ट्रपति चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया है लेकिन अभी भी वह डेमोक्रेट्स के आधिकारिक उम्मीदवार नहीं थे। डेमोक्रेट्स 19 से 22 अगस्त तक शिकागो में अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का औपचारिक रूप से चयन करने के लिए जुटेंगे। प्राइमरी चुनाव में जीत के बाद बाइडन का उम्मीदवार बनना लगभग तय था। डेमोक्रेटिक राष्ट्रीय समिति ने सम्मेलन से पहले इलेक्ट्रॉनिक रोल कॉल के जरिए बाइडन को वर्चुअल रूप से उम्मीदवार चुनने की योजना बनाई थी। हालांकि, नई योजनाएं अभी तक जारी नहीं की गई हैं। 

जो बाइडन - फोटो : Amar Ujala
बाइडन की जगह कौन ले सकता है?
बाइडन की दावेदारी छोड़ने के बाद डेम्रोक्रेट्स में नए चेहरे को लेकर कश्मकश शुरू होना लाजमी है। कुछ संभावित चेहरों पर गौर करें तो उनमें उपराष्ट्रपति कमला हैरिस सबसे प्रमुख मानी जा रही हैं जिनका समर्थन खुद राष्ट्रपति बाइडन ने भी किया है। वह पहली महिला अमेरिकी उपराष्ट्रपति हैं। यदि कमला को पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना चेहरा बनाती है और वह नवंबर में ट्रंप को हरा देती हैं तो वह अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बन जाएंगी। बाइडन के कुछ समय बाद ही बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन ने भी शीर्ष पद के लिए हैरिस का समर्थन किया।

इलिनोइस राज्य के 59 वर्षीय गवर्नर जेबी प्रित्जकर संभावित रूप से सबसे अहम लोगों में से एक हैं। उन्होंने इलिनोइस में गर्भपात के अधिकार को संहिताबद्ध किया है जो अमेरिकी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। प्रित्जकर ने बंदूक नियंत्रण पर भी मजबूत कदम उठाए हैं।

तीसरा बड़ा चेहरा ग्रेचेन मिशिगन की 52 वर्षीय गवर्नर व्हिटमर हैं। वह 2020 में बाइडन के लिए उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों में थीं। ग्रेचेन सख्त बंदूक कानूनों, गर्भपात प्रतिबंधों को हटाने के समर्थन में रही हैं। 
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