अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के कोरोना राहत पैकेज के सीनेट में पास होने को लेकर अनिश्चिय और बढ़ गया है। इस पैकेज को पारित कराने की कोशिश में राष्ट्रपति बाइडन ने सोमवार को रिपब्लिकन पार्टी के दस सीनेटरों से मुलाकात की लेकिन इस बैठक के बावजूद यह साफ नहीं हो पाया कि 1.9 खरब डॉलर के पूरे राहत पैकेज को सीनेट की मंजूरी मिल जाएगी।
अमेरिकी सीनेट के एक नियम के मुताबिक कोई सदस्य फिलिबस्टर प्रावधान को लागू करवा सकता है। इसके तहत तब बिल पास करने के लिए 100 सदस्यीय सदन के 60 सदस्यों का समर्थन जरूरी हो जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास सिर्फ 51 वोटों का इंतजाम है। रिपब्लिकन पार्टी का खास विरोध 15 डॉलर प्रति घंटे न्यूनतम वेतन करने के प्रस्ताव को लेकर है।
अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक बाइडन और दस रिपब्लिकन सीनेटरों की बैठक सद्भावपूर्ण रही लेकिन अखबार ने कहा है कि मुमकिन है कि जो सद्भावना दिखाई गई, वह महज दिखावटी हो। इसलिए कि दोनों पार्टियों के बीच आर्थिक मामलों पर खाई बहुत चौड़ी है।
गौरतलब है कि रिपब्लिकन पार्टी के उदारवादी समझे जाने वाले छह सीनेटरों ने रविवार को एक वैकल्पिक राहत पैकेज का मसविदा पेश किया था। यह प्रस्तावित पैकेज 618 अरब डॉलर का है। इसके तहत जरूरतमंद नागरिकों को सीमित आर्थिक मदद देने, जून तक कोरोना संबंधी बेरोजगारी लाभ को बढ़ाने, वैक्सीन वितरण के लिए धन देने, स्कूल और छोटे कारोबार को दोबारा खोलने के लिए आर्थिक मदद देने आदि जैसे प्रावधान हैं लेकिन ये सारी मदद राष्ट्रपति बाइडन के पैकेज से कम रकम की है।
इस सूरत को देखते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े ने रिपब्लिकन पार्टी के एतराज को दरकिनार करते हुए पूरा राहत पैकेज पास कराने की मुहिम छेड़ दी है। अब सीनेट की बजट कमेटी के प्रमुख सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स बन गए हैँ। सैंडर्स की दलील है कि सीनेट के एक दूसरे नियम के तहत फिलिबस्टर को नजरअंदाज किया जा सकता है।
उनके मुताबिक बजट रिकॉनसिलिएशन ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत वित्तीय प्रस्ताव भी साधारण बहुमत से पारित कराए जा सकते हैं। सैंडर्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में रिपब्लिकन पार्टी ने अपने कई बिल इसी प्रावधान के तहत पास कराए थे।
सीनेट में दोनों पार्टियों के पास 50- 50 सदस्यों का समर्थन है लेकिन उप राष्ट्रपति को एक वोट देने का अधिकार होता है। प्रोग्रेसिव्स की दलील है कि उप राष्ट्रपति कमला हैरिस अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रिकॉनसिलिएशन प्रावधान के तहत जो बाइडन के पूरे कोरोना पैकेज को पारित करवा सकती हैं।
मगर रिपब्लिकन सदस्यों की दलील है कि न्यूनतम वेतन में वृद्धि जैसे प्रस्तावों को रिकॉनसिलिएशन प्रावधान के तहत बायर्ड रूल की शर्तों से भी गुजरना होता है। उस हाल में इसका पास होना कठिन हो जाएगा लेकिन बायर्ड रूल ऐसे मामलों में लागू करना अनिवार्य है या नहीं, इसको लेकर दोनों पार्टियों में विवाद खड़ा हो गया है।
प्रोग्रेसिव खेमे की मांग है कि बाइडन प्रशासन इस मामले में आक्रामक रुख अपनाए। उसकी मांग है कि कमला हैरिस अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर ये व्यवस्था दें कि कांग्रेस बजट रिकॉनसिलिएशन के तहत न्यूनतम वेतन संबंधी प्रस्ताव को शामिल किया जा सकता है।
इस खेमे से जुड़े नेता बिल डस्टर ने दावा किया है कि उप राष्ट्रपति को ऐसा अधिकार संविधान से मिला हुआ है। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सदस्य और बर्नी सैंडर्स के करीबी माने जाने वाले नेता रो खन्ना ने कहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को बजट रिकॉनिसिलिएशन के मामले में बड़ी सोच दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी राय में इस मामले में रिकॉनसिलिएशन के जरिए फिलिबस्टर को नाकाम किया जा सकता है।
जानकारों का कहना है कि ये मामला भी अमेरिका में शासन प्रक्रिया के लगातार जटिल होते जाने की एक मिसाल है। भारी बहुमत निर्वाचित राष्ट्रपति अगर महामारी राहत पैकेज पास नहीं करवा पाते हैं, तो इसे अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के गतिरुद्ध होने का संकेत ही समझा जाएगा।