पिछली छह जनवरी को यहां कैपिटल हिल (संसद भवन) पर हुए डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद अमेरिकी पुलिस के व्यवहार पर भी गहरी चर्चा जारी है। आरोप यह लगा है कि कैपिटल हिल में घुसपैठ की कोशिश में पुलिस ने ट्रंप समर्थकों का सहयोग किया। जिन पुलिसकर्मियों ने ऐसा नहीं किया, उनका रुख भी खासा नरम रहा। इस आधार पर यह भी कहा गया है कि ट्रंप समर्थक धुर दक्षिणपंथियों की पैठ अब पुलिस और प्रशासन में बन गई है।
लेकिन अब इस बारे सामने आए आंकड़ों से जाहिर होता है कि श्वेत प्रदर्शनकारियों के प्रति अमेरिकी पुलिस का रुख पहले भी नरम रहा है। राजनीतिक प्रदर्शनों का अध्ययन करने वाले एक थिंक टैंक के आंकड़ों के मुताबिक श्वेत प्रदर्शनों की तुलना में काले समुदाय के प्रदर्शनों के प्रति पुलिस का रुख तीन गुना ज्यादा सख्त रहता है। पिछले दस महीनों के दौरान ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलनकारियों के प्रदर्शनों पर पुलिस ने आंसू गैस, मिर्च स्प्रे, रबर बुलेट और डंडों से पिटाई का इस्तेमाल किया। ट्रंप समर्थक प्रदर्शनकारियों पर ऐसे किसी उपाय को नहीं आजमाया गया।
ये आंकड़े यूएस क्राइसिस मॉनिटर डेटाबेस से सामने आए हैं। डाटाबेस आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डाटा प्रोजेक्ट नाम के थिंक टैंक ने जुटाए हैं। इनसे यह भी जाहिर होता है कि अमेरिकी पुलिस वामपंथी प्रदर्शनकारियों पर बहुत ज्यादा सख्ती बरतती है। यूएस क्राइसिस मॉनिटर डॉटा बेस में अप्रैल 2020 के बाद अमेरिका भर में हुए 13 हजार से ज्यादा प्रदर्शनों की जानकारी शामिल है। इनसे यह साफ हो जाता है कि पुलिस ने ब्लैक लाइव्स मैटर प्रदर्शनकारियों पर ट्रंप समर्थकों की तुलना में कितनी ज्यादा बेरहम कार्रवाई की। ट्रंप समर्थकों ने छह जनवरी के प्रदर्शन के पहले भी देश में कई रैलियां की थीं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले साल अमेरिका में हुए हजारों प्रदर्शनों में ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे। दक्षिणपंथियों और वामपंथियों ने अपने ज्यादातर प्रदर्शनों में हिंसा नहीं की। लेकिन वामपंथियों के 511 प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने आंसू गैस, रबर बुलेट, डंडों से पिटाई या किसी अन्य तरह से ताकत का इस्तेमाल किया। अखबार द गार्जियन के यूएस मॉनिटर डाटाबेस के किए एक विश्लेषण के मुताबिक 4.7 फीसदी वामपंथी प्रदर्शनों के दौरान ने पुलिस ने ताकत का प्रदर्शन किया, जबकि दक्षिणपंथियों के सिर्फ 1.4 प्रतिशत प्रदर्शनों के दौरान ऐसा किया गया। जिन प्रदर्शनों के दौरान कोई हिंसा नहीं हुई, उनमें भी पुलिस ने तीन गुना ज्यादा मौकों पर वामपंथी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपनी ताकत दिखाई। आर्म्ड कॉन्फिलिक्ट लोकेशन एंड इवेन्ट डाटा प्रोजेक्ट अनुसंधान विभाग के निदेशक डॉ राउदाबेह किशी ने द गार्जियन से कहा- ऐसा नहीं है कि सिर्फ हिंसा के समय पुलिस वामपंथी प्रदर्शनकारियों पर ज्यादा सख्त कार्रवाई करती है। बल्कि ऐसा अहिंसक प्रदर्शनों के मामले में भी होता है। यह एक ट्रेंड है, जो आंकड़ों से जाहिर है।
प्रोजेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल 2020 से 8 जनवरी 2021 तक हुए 10,863 ब्लैक लाइव्स मैटर प्रदर्शनों में नौ फीसदी में पुलिस ने हस्तक्षेप किया। जबकि इसी दौरान 2,295 दक्षिणपंथी प्रदर्शनों में सिर्फ चार फीसदी में पुलिस ने दखल दिया। वामपंथी प्रदर्शनों में पुलिस ने जितनी बार दखल दिया, उसमें 50 फीसदी में उसने हिंसक ताकत का इस्तेमाल किया। दक्षिणपंथी प्रदर्शनों के मामले ऐसा सिर्फ एक तिहाई में हुआ। प्रोजेक्ट के आंकड़ों से साफ है कि मीडिया में होने वाली चर्चाओं के विपरीत ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। इस आंदोलन के 93 फीसदी प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
इन आंकड़ों से अमेरिका में पुलिस की भूमिका और उसके नजरिए पर एक नई रोशनी पड़ी है। इससे यह समझना आसान हुआ है कि छह जनवरी को ट्रंप समर्थक कैसे उतनी आसानी से संसद भवन के अंदर घुस गए।