अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की पाकिस्तान की इच्छा तब तक पूरी नहीं हो सकती है जब तक कि इस्लामाबाद आतंकवाद की नीति तथा भारत और चीन के साथ अपने रिश्तों में बदलाव नहीं लाता।
यह राय दो अमेरिकी विशेषज्ञों की है। उन्होंने कहा, रणनीतिक साझेदारों को रणनीतिक हितों पर एकमत होने की जरूरत है और मौजूदा दौर में पाक-अमेरिका के बीच अफगानिस्तान व चीन को लेकर सहमति नहीं है।
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच पुराने दिनों की तरह नहीं हो सकते संबंध विशेषज्ञ
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद अमेरिका-पाकिस्तान संबंध विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की पूर्व वरिष्ठ निदेशक और ‘सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी’ में सीनियर फेलो, लीजा कर्टिस ने कहा कि अफगानिस्तान और चीन को लेकर पाकिस्तान के साथ सहमति नहीं होना बताता है कि पाक-अमेरिकी रिश्ते सामान्य नहीं हैं।
हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित सम्मेलन में कर्टिस ने कहा, तालिबान का समर्थन करने की पाकिस्तानी नीतियां उसके अपने हित में नहीं हैं। ओबामा प्रशासन में व्हाइट हाउस में सेवा दे चुके जोशुआ व्हाइट ने कहा कि अमेरिका, अफगानिस्तान से सेनाएं वापस बुलाने के दौरान एक बार फिर पाक पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहा है, लेकिन इस बार वह पाकिस्तान का सहयोग लेने के लिए उसे वित्तीय सहायता देने की जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता।